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डीजल खरीद पर अंकुश: सरकार के फैसले से अस्पताल, डेटा सेंटर और IT कंपनियां क्यों हैं परेशान

उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि डीजल की खरीद पर सरकार के अंकुश उन क्षेत्रों के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं, जहां डीजल जनरेटर न केवल इमरजेंसी बैकअप बल्कि डिमांड पीक पर होने पर बिजली के रेगुलर सोर्स के रूप में भी इस्तेमाल किए जाते हैं

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Jun 14, 2026 पर 10:59 AM
डीजल खरीद पर अंकुश: सरकार के फैसले से अस्पताल, डेटा सेंटर और IT कंपनियां क्यों हैं परेशान
उद्योगों के प्रतिनिधियों ने अस्पतालों, टेलिकॉम नेटवर्क, डेटा सेंटर और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए छूट व परिचालन संबंधी स्पष्टता की मांग की है।

सरकार ने इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल पंपों से डीजल खरीद पर रोक लगा दी है। साथ ही खुदरा बिक्री केंद्रों से प्रति ग्राहक या वाहन प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल खरीदने की सीमा तय की है। सरकार के नए फैसले से उन अस्पतालों, आईटी पार्क्स, डेटा सेंटर्स और औद्योगिक इकाइयों की चिंता बढ़ गई है, जो बिजली आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर डीजल जनरेटर पर निर्भर हैं। सरकार का कहना है कि उसका यह कदम ईंधन आपूर्ति के संरक्षण और खुदरा उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित डीजल के कहीं और इस्तेमाल को रोकने के लिए है।

ये अंकुश अधिकतम 90 दिन के लिए लागू किए गए हैं। सरकार का कहना है कि हाल के दिनों में डीजल और पेट्रोल की खुदरा बिक्री में असामान्य वृद्धि देखी गई। पश्चिम एशिया संकट के बाद खुदरा और थोक डीजल कीमतों के बीच बढ़े अंतर के कारण कई इंडस्ट्रियल और संस्थागत उपभोक्ता कम कीमत का फायदा उठाने के लिए थोक आपूर्ति चैनल के बजाय पेट्रोल पंप से ईंधन खरीद लगे। इससे कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी का जोखिम पैदा हो गया। सरकारी आदेश के तहत ऐसे उपभोक्ताओं को अब ईंधन की खरीद प्रतिबद्ध उपभोक्ता पंप या थोक आपूर्ति व्यवस्था के माध्यम से करनी होगी। दिल्ली में पेट्रोल पंप पर डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि थोक बिक्री मूल्य 134.50 रुपये प्रति लीटर है।

उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि सरकार की यह रोक उन क्षेत्रों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है, जहां डीजल जनरेटर न केवल इमरजेंसी बैकअप बल्कि डिमांड पीक पर होने पर बिजली के रेगुलर सोर्स के रूप में भी इस्तेमाल किए जाते हैं।

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