राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति यानि नेशनल इमरजेंसी में देश में उत्पादित सभी तेल और प्राकृतिक गैस पर सरकार का पूर्व-अधिकार होगा। संशोधित तेल क्षेत्र कानून के तहत तैयार किए जा रहे नियमों के ड्राफ्ट में ऐसा है। पूर्व-अधिकार, किसी पक्ष- अक्सर सरकार या मौजूदा शेयरधारक का कानूनी अधिकार है कि वह किसी प्रोडक्ट, एसेट या रिसोर्स को दूसरों को पेश किए जाने से पहले उसकी खरीद या उस पर दावा कर सकता है।
जमीन के अंदर से या समुद्र तल के नीचे से निकाले गए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर इस तरह के अधिकार का मकसद सरकार को राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने और आपात स्थिति के दौरान सार्वजनिक कल्याण सुनिश्चित करने में मदद करना है। कच्चे तेल को रिफाइन कर पेट्रोल, डीजल और केरोसीन जैसे ईंधन हासिल किए जाते हैं। वहीं प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, फर्टिलाइजर के उत्पादन, व्हीकल्स के लिए सीएनजी और रसोई के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
पूर्व-अधिकार के लिए प्रोड्यूसर्स को किस रेट पर होगा पेमेंट
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नियमों के ड्राफ्ट में कहा गया है कि तेल और प्राकृतिक गैस के प्रोड्यूसर्स को पूर्व-अधिकार के समय के फेयर मार्केट प्राइस का भुगतान किया जाएगा। इस वर्ष की शुरुआत में संसद ने ऑयलफील्ड्स (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) अमेंडमेंट बिल पारित किया था। इसके बाद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने नियमों के ड्राफ्ट पर कमेंट्स मांगे हैं। यह बिल पुराने 1948 के कानून की जगह लेगा। इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और देश के एनर्जी ट्रांजिशन लक्ष्य को सपोर्ट करना है।
नियमों में कहा गया है कि, "पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स या खनिज तेल के संबंध में नेशनल इमरजेंसी की स्थिति में भारत सरकार को, ऐसे आपातकाल के दौरान हर समय, लीज पर दिए गए क्षेत्र से निकाले गए कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस से उत्पादित खनिज तेलों, रिफाइंड पेट्रोलियम या पेट्रोलियम या खनिज तेल उत्पादों पर पूर्वाधिकार का अधिकार होगा। इसके दायरे में ऐसा कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस भी आएंगे, जिसे पट्टेदार को भारत के अंदर रिफाइन किए बिना बेचने, निर्यात करने या डिस्पोज करने की इजाजत है।"
युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं को माना जा सकता है नेशनल इमरजेंसी
इस अधिकार का इस्तेमाल भारत सरकार की ओर से पट्टेदार को उस समय की प्रचलित दर पर भुगतान करके किया जाएगा। हालांकि, नियमों में यह परिभाषित नहीं किया गया है कि नेशनल इमरजेंसी के तहत किस तरह की स्थितियां आएंगी। पीटीआई के मुताबिक, उद्योग सूत्रों का कहना है कि युद्ध या युद्ध जैसी परिस्थितियां या प्राकृतिक आपदाएं राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति हो सकती हैं।
ड्राफ्ट नियमों में तेल और गैस ऑपरेटर्स को अप्रत्याशित घटना की स्थिति में अधिनियम के तहत दायित्वों से छूट देने का भी प्रावधान है। अप्रत्याशित घटना में एक्ट ऑफ गॉड, युद्ध, विद्रोह, दंगा, नागरिक उपद्रव, ज्वार, तूफान, बाढ़, बिजली, विस्फोट, आग, भूकंप, महामारी और कोई अन्य ऐसी घटना शामिल है, जिसे पट्टेदार उचित रूप से रोक या नियंत्रित नहीं कर सकता है।