गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं और एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना मजबूत जनाधार दिखाया है। राज्य के 15 नगर निगमों में से 10 पर बीजेपी ने साफ बहुमत हासिल कर लिया है। वहीं इस चुनावी नतीजों में भारतीय क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की बहन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रविंद्र जडेजा की बहन नयनाबा को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस ने उन्हें स्थानीय निकाय चुनावों में कैंडिडेट बनाया था। नयनाबा जडेजा राजकोट नगर निगम के वार्ड संख्या-2 से चुनाव लड़ी थीं लेकिन मंगलवार को चुनावी नतीजों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है।
नयनाबा ने यहां से लड़ा था चुनाव
बता दें कि, भारतीय क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा जडेजा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की विधायक हैं, जबकि उनकी बहन नयनाबा कांग्रेस पार्टी से जुड़ी हुई हैं। नयनाबा ने राजकोट से चुनाव लड़ा था और जीत की उम्मीद कर रही थीं, लेकिन इस बार भी मतदाताओं ने बीजेपी पर ही भरोसा जताया। नतीजों में नयनाबा को हार का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें बड़ा झटका लगा। डिवीजन नंबर 2 में कांग्रेस ने नयनाबा को मजबूत उम्मीदवार के तौर पर पेश करने की पूरी कोशिश की। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने बीजेपी की नीतियों की खुलकर आलोचना भी की। इसके बावजूद, मतदाताओं ने बीजेपी के उम्मीदवारों को ही समर्थन दिया। राजकोट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है, और इस चुनाव में भी पार्टी ने अपनी पकड़ बनाए रखी। नयनाबा की हार को कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक निराशा के रूप में देखा जा रहा है।
नयनाबा जडेजा ने चुनाव में हार के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें जनता का फैसला पूरी तरह स्वीकार है। उन्होंने कहा, “चुनाव में जीत और हार दोनों ही सामान्य बातें हैं और यह प्रक्रिया का हिस्सा हैं।” उन्होंने आगे कहा कि वह आगे भी अपनी पार्टी और लोगों के लिए पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम करती रहेंगी। नयनाबा ने यह भी बताया कि वह समाज सेवा से जुड़ी हुई हैं और भविष्य में भी इसी तरह लोगों की मदद करती रहेंगी। साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान उन्हें कई तरह की शिकायतें भी सुनने को मिलीं, जिन पर वह आगे ध्यान देंगी।
नयनाबा जडेजा भारतीय क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की बहन हैं। वह कई सालों से कांग्रेस पार्टी से जुड़ी हुई हैं और एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही हैं। नयनाबा ने पहली बार राजकोट की स्थानीय निकाय चुनाव में हिस्सा लिया। उन्होंने कांग्रेस की तरफ से पार्षद (कॉर्पोरेटर) पद के लिए अपना नामांकन भरा था। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिली और हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, वह राजनीति और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय बनी हुई हैं।