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Gujarat News: गुजरात के चिड़ियाघरों में भैंसों को मारने के खिलाफ याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

Gujarat News: 29 जनवरी को गुजरात हाई कोर्ट ने एक NGO की तरफ से दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया था। इस याचिका में जूनागढ़ के 'सक्करबाग जूलॉजिकल पार्क' परिसर के अंदर टेंडर प्रक्रिया के जरिए नियुक्त एक ठेकेदार द्वारा भैंसों को संभालने और उन्हें मारने के तरीके को चुनौती दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने इनकार कर दिया है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड May 18, 2026 पर 6:23 PM
Gujarat News: गुजरात के चिड़ियाघरों में भैंसों को मारने के खिलाफ याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
Gujarat News: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात के चिड़ियाघरों में भैंसों को मारने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी

Gujarat News: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 मई) को गुजरात हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें भैंसों को मारने से जुड़े एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया गया था। इस PIL में गुजरात के दो चिड़ियाघरों के अंदर जंगली जानवरों को खिलाने के लिए भैंसों को मारे जाने को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत ने दोनों चिड़ियाघरों में जंगली जानवरों को खिलाने के लिए भैंसों की हत्या के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने इस प्रथा को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि जानवरों को किसी भी कमर्शियल या निजी मकसद से नहीं मारा जा रहा था। पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिन नियमों का हवाला दिया जा रहा है, वे मुख्य रूप से मानव उपभोग के लिए संचालित बूचड़खानों पर लागू होते हैं।

क्या है पूरा मामला?

अदालत की यह टिप्पणी तब सामने आई जब याचिकाकर्ता NGO 'एनिमल वेलफेयर फाउंडेशन' ने दलील दी कि चिड़ियाघर के अंदर जानवरों को मारना एक बूचड़खाना चलाने जैसा है। इसके लिए कानूनों का पालन करना जरूरी है। जस्टिस मेहता ने कहा, "नियमों का यह पूरा पुलिंदा उन बूचड़खानों के लिए है, जहां जानवरों को इंसानों के खाने या कमर्शियल मकसद से मारा जाता है। उन्हें चिड़ियाघर का मैनेजमेंट अपनी मर्जी से करने दें।"

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