Al-Falah University: लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए बम धमाके में 15 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही यूनिवर्सिटी पर संकट मंडरा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि संस्थान से जुड़े तीन डॉक्टरों के नाम जांच में सामने आए थे। अब इस यूनिवर्सिटी को हरियाणा सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। का संचालन सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक करेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि यूनविर्सिटी के कामकाज में कई नियमों और कानूनी उल्लंघनों के मिलने के बाद राज्य सरकार ने यह कदम उठाया, और सीनियर आईएएस ऑफिसर को एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया है। अधिकारियों ने कहा कि फैकल्टी पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा और वे पूरी तरह से पहले की तरह काम करते रहेंगे।
विश्वविद्यालय के लगभग 1,700 छात्रों की पढ़ाई जारी रखने के लिए राज्य ने फरीदाबाद की जेसी बोस यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की एक टीम को प्रमुख पदों पर नियुक्त किया है। जेसी बोस यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार अजय रंगा को कुलपति नियुक्त किया गया है, रवि कुमार शर्मा को चीफ फाइनेंस एंड अकाउंट ऑफिसर बनाया गया है, वहीं मेहा शर्मा रजिस्ट्रार के रूप में कार्य करेंगी। अभिनव और राजदीप को भी उपकुलपति और रजिस्ट्रार के अधीन प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि शैक्षणिक गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और फैकल्टी (स्टाफ) में कोई बदलाव नहीं होगा
यह कदम आईएएस अधिकारी श्यामल मिश्रा के जांच के बाद उठाया गया है, जिसमें विश्वविद्यालय के कामकाज में कई कानूनी उल्लंघन और अनियमितताएं पाई गईं।
साथ ही यह कार्रवाई उस समय हुई है जब हरियाणा विधानसभा ने 22 दिसंबर को निजी विश्विद्यालयों की निगरानी कड़ी करने के लिए नया कानूनी ढांचा पास किया था।
1 करोड़ तक लगेगा जुर्माना
हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (संशोधन) बिल में सेक्शन 44 में नया क्लॉज जोड़ा गया है, जिसमें कुप्रशासन, झूठे या भ्रामक जानकारी देना और शैक्षणिक एवं नियामक मानकों को पूरा न करने पर दंड का प्रावधान है। इसके तहत, राज्य अब विशेष कोर्स में प्रवेश रोक सकता है, 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है और गंभीर मामलों में, अगर 30 दिनों के अंदर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो राज्य यूनिवर्सिटी को बंद करने का आदेश भी दे सकता है।
बता दें कि पिछले साल अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक गुप्त आतंकी मॉड्यूल का केंद्र बन गया था, जब यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर उमर उन नबी को 10 नवंबर को लाल किले के पास विस्फोटकों से भरी कार चलाते हुए और उसमें धमाका करते हुए पाया गया था, जिसमें 15 लोग मारे गए थे। इस मामले में दो अन्य फैकल्टी के सदस्य, मुजम्मिल अहमद गनाई और शाहीन शाहिद को गिरफ्तार किया गया था। अलग से, अल-फलाह ग्रुप के संस्थापक और अध्यक्ष को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया था।