पुणे को लंबे समय से ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ कहा जाता है। यह शहर अपने बड़े कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए जाना जाता है। लेकिन अब यही शहर देश के सबसे बड़े परीक्षा के हुए पेपर लीक के कारण चर्चा में है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई , NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच कर रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि पुणे इस पूरे रैकेट का एक बड़ा केंद्र हो सकता है। अब तक की जांच में एक ऐसे नेटवर्क का पता चला है, जिसमें पेपर तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े कुछ प्रोफेसर, बिचौलिए, कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग और कुछ छात्र शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन छात्रों ने परीक्षा के लीक सवाल पाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए थे।
केमिस्ट्री के रिटायर्ड प्रोफेसर का नाम आया सामने
जांच के केंद्र में केमिस्ट्री के रिटायर्ड प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी का नाम सामने आया है। सीबीआई के मुताबिक, पी. वी. कुलकर्णी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के लिए परीक्षा से जुड़े गोपनीय कामों में शामिल थे। इसी वजह से उन्हें नीट परीक्षा के प्रश्न पत्रों तक पहुंच मिली हुई थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उन्होंने इस पहुंच का गलत इस्तेमाल करते हुए 3 मई को हुई परीक्षा से पहले केमिस्ट्री के सवाल लीक किए। पी. वी. कुलकर्णी ने लातूर के दयानंद कॉलेज में करीब 30 साल तक पढ़ाया था। रिटायर होने के बाद भी वह नीट परीक्षा से जुड़े छात्रों को मार्गदर्शन देते रहे। बताया जा रहा है कि वह पुणे और लातूर के छात्रों को पढ़ाते थे और लातूर में शिवाजी चौक के पास स्थित अपने बंगले में गाइडेंस सेशन भी आयोजित करते थे।
नोटबुक्स में मिले पेपर के सवाल
जांच एजेंसियों का ध्यान सबसे ज्यादा उन नोटबुक्स पर गया है, जो कथित तौर पर उन छात्रों से बरामद हुईं जिन्होंने NEET परीक्षा से पहले निजी सत्रों में हिस्सा लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इन सत्रों में छात्रों को जो सवाल लिखवाए गए थे, उनमें से कई सवाल असली परीक्षा के प्रश्न पत्र से काफी मिलते-जुलते बताए जा रहे हैं। CBI इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। वहीं, पड़ोसियों का कहना है कि उन्हें पता था कि पी. वी. कुलकर्णी अक्सर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से जुड़े कामों के लिए दिल्ली आते-जाते रहते थे, लेकिन उन्हें कभी कोई संदिग्ध गतिविधि नजर नहीं आई। एक पड़ोसी ने बताया, “वह बहुत शांत स्वभाव के इंसान थे और ज्यादातर अपने काम से ही मतलब रखते थे।”
जांच एजेंसियों को अब शक है कि महाराष्ट्र के कोचिंग नेटवर्क में पी. वी. कुलकर्णी की लंबे समय से मजबूत पकड़ थी। इसी वजह से यह कथित रैकेट काफी समय तक बिना किसी शक के अपना काम करता रहा। जांचकर्ताओं का मानना है कि कोचिंग संस्थानों और छात्रों के बीच उनकी पहचान और संपर्कों ने इस पूरे नेटवर्क को चुपचाप चलाने में मदद की हो सकती है।
अब तक हुई इन लोगों की गिरफ्तारी
CBI ने पी. वी. कुलकर्णी की गिरफ्तारी के एक दिन बाद पुणे की एक और शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंधारे को गिरफ्तार किया। मनीषा पुणे के मॉडर्न कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स में वनस्पति विज्ञान की प्रोफेसर हैं। सीबीआई के मुताबिक, मनीषा मंधारे कथित तौर पर जीव विज्ञान के पेपर लीक मामले की मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल थीं। जांच एजेंसी का कहना है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने उन्हें एक विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया था, जिसके कारण उन्हें बॉटनी और जूलॉजी के प्रश्न पत्रों तक पहुंच मिली हुई थी। जांचकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने अप्रैल महीने में पुणे स्थित अपने घर पर कुछ खास कोचिंग सत्र आयोजित किए। इन सत्रों में छात्रों को कथित तौर पर वही सवाल और जवाब लिखवाए गए, जो बाद में असली नीट परीक्षा में पूछे गए।
इन आरोपों के सामने आने के बाद उस कॉलेज में भी हैरानी का माहौल है, जहां मनीषा गुरुनाथ मंधारे पिछले 20 साल से ज्यादा समय से पढ़ा रही थीं। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मॉडर्न कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स ने अपने बयान में कहा कि मंधारे साल 2002 से 11वीं और 12वीं के छात्रों को बायोलॉजी पढ़ा रही थीं। कॉलेज ने यह भी बताया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की तरफ से उन्हें जो काम दिया गया था, वह पूरी तरह गोपनीय था। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उन्हें मंधारे की गिरफ्तारी की जानकारी टीवी खबरों के जरिए मिली। संस्थान ने इस पूरे मामले को “गंभीर, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय” बताया है। साथ ही कॉलेज ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी है।