Lucknow Cyber Fraud: लखनऊ से साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। दरअसल, यहां पर 85 साल के एक बुजुर्ग को ठगों ने पुलिस और ATS अधिकारी बनकर “डिजिटल अरेस्ट” में फंसाकर उनसे कथित तौर पर 84.5 लाख रुपये ऐंठ लिए।
Lucknow Cyber Fraud: लखनऊ से साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। दरअसल, यहां पर 85 साल के एक बुजुर्ग को ठगों ने पुलिस और ATS अधिकारी बनकर “डिजिटल अरेस्ट” में फंसाकर उनसे कथित तौर पर 84.5 लाख रुपये ऐंठ लिए।
पीड़ित बदरुद्दीन अंसारी, जो जनकपुरम के सेक्टर-G के निवासी हैं, ने बताया कि यह सिलसिला 7 मार्च को शुरू हुआ, जब उन्हें लखनऊ पुलिस मुख्यालय के सीनियर इंस्पेक्टर होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने उन्हें चेतावनी दी कि पुणे में मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में उनका नाम सामने आया है और आरोप लगाया कि अवैध लेनदेन के लिए उनके नाम पर एक फर्जी HDFC बैंक खाता खोला गया है।
ठगों ने बुजुर्ग को भेजे जाली दस्तावेज
इसके बाद करीब एक महीने तक लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। जालसाजों ने WhatsApp और Signal के जरिए जाली दस्तावेज भेजे, जिन पर NIA, सुप्रीम कोर्ट और RBI जैसी एजेंसियों के नाम थे, ताकि उनके दावे वैध लगें। कई कॉल करने वाले, खुद को ATS अधिकारी बताकर, लगातार संपर्क में रहे और गिरफ्तारी व कानूनी कार्रवाई की धमकी देते रहे।
पीड़ित ने 84.5 लाख रुपये ठगों के बैंक अकाउंट में किए ट्रांसफर
वहीं, डर के मारे बुजुर्ग व्यक्ति ने ठगों की बात मान ली। 11 मार्च से 4 अप्रैल के बीच उन्होंने ठगों के कंट्रोल वाले कई अलग-अलग खातों में 84.5 लाख रुपये की भारी रकम ट्रांसफर कर दी।
पीड़ित ने दर्ज कराया केस
यह भयानक सपना तब खत्म हुआ जब अंसारी, बुरी तरह घबराकर, 21 दिन बाद साइबर पुलिस के पास पहुंचे। मामला दर्ज कर लिया गया है और जांचकर्ताओं ने अब तक 27 लाख रुपये जब्त कर लिए हैं। बाकी पैसे का पता लगाने और उसे वसूलने के प्रयास जारी हैं।
अधिकारियों ने क्या कहा?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला "डिजिटल अरेस्ट" जैसे बढ़ते साइबर फ्रॉड के खतरे को दिखाता है, जहां ठग डर और सरकारी अधिकार का गलत इस्तेमाल कर लोगों को फंसा लेते हैं और उनसे पैसे ऐंठ लेते हैं।
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