रानी कपूर, जो दिवंगत कारोबारी संजय कपूर की मां हैं, उन्होंने मंगलवार, 12 मई को सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की। उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि जब तक मध्यस्थता (मेडिएशन) की प्रक्रिया चल रही है, तब तक आरके फैमिली ट्रस्ट के मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप न किया जाए।
समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, रानी कपूर की ओर से पेश वकील ने निर्देश देने की मांग की कि संजय की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और अन्य प्रतिवादियों को मध्यस्थता कार्यवाही लंबित रहने तक आरके फैमिली ट्रस्ट के कामकाज में हस्तक्षेप करने से रोका जाए।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि 18 मई को होने वाली कंपनी की बोर्ड बैठक पर रोक लगाई जाए। यह बैठक रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जारी की गई थी, जो विवादित पारिवारिक संपत्ति का बड़ा हिस्सा रखती है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बोर्ड की बैठक रोकने से इनकार कर दिया, हालांकि, उसने कहा कि विवादित एजेंडा को प्रभावी नहीं बनाया जाना चाहिए।
इसके साथ ही कोर्ट ने प्रिया की कानूनी टीम को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया जाए जिससे मध्यस्थता (मेडिएशन) की प्रक्रिया प्रभावित हो।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मध्यस्थता की प्रगति की समीक्षा करेगा। साथ ही, कोर्ट ने संकेत दिया कि इस दौरान आरबीआई किसी तरह की सख्त कार्रवाई या अनुपालन पर जोर न दे।
रानी कपूर ने तर्क दिया कि मामला पहले ही मध्यस्थता के लिए भेजा जा चुका है और ऐसी बैठकें स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं। वहीं, दूसरी तरफ प्रिया और अन्य प्रतिवादियों ने दलील दी कि यह बैठकें निदेशकों की नियुक्ति से जुड़े RBI के नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार बुलाई गई थीं।
सुनवाई कर रहे जस्टिस परदीवाला ने कहा, “हम सब खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाएंगे… हम अपने साथ सिर्फ अपनी आत्मा लेकर जाएंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “मामले को सुलझाने की इच्छा होनी चाहिए… भारी मन से मध्यस्थ के समक्ष न जाएं।”
बता दें कि रानी कपूर ने “रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड” नामक कंपनी द्वारा निर्धारित बैठक को चुनौती देते हुए कोर्ट का रुख किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि RIPL के पास काफी संपत्ति है।