'नेहा सिंह के साथ गलत हुआ' Galgotias University ने अपनी गलती छुपाने के लिए एक प्रोफेसर को बनाया 'बलि का बकरा'? लोग पूछ रहे ऐसे सवाल

18 फरवरी को यूनिवर्सिटी ने सार्वजनिक माफी जारी की। बयान में कहा गया कि रोबोट यूनिवर्सिटी की अपनी खोज नहीं है और संस्था ने ऐसा कभी दावा भी नहीं किया। साथ ही यह भी कहा गया कि पवेलियन पर मौजूद एक प्रतिनिधि को पूरी जानकारी नहीं थी और बिना अनुमति मीडिया से बात कर बैठी

अपडेटेड Feb 19, 2026 पर 1:35 PM
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लोग आरोप लगा रहे हैं कि Galgotias यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती छुपाने के लिए प्रोफेसर नेहा सिंह को “बलि का बकरा” बना दिया

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में “रोबोट डॉग” को लेकर शुरू हुआ विवाद अब Galgotias University के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। सोशल मीडिया पर लोग आरोप लगा रहे हैं कि यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती छुपाने के लिए एक प्रोफेसर को “बलि का बकरा” बना दिया। यह मामला तब शुरू हुआ जब समिट में यूनिवर्सिटी की ओर से पहुंचीं प्रोफेसर नेहा सिंह ने DD News को इंटरव्यू देते हुए कहा कि उनके पवेलियन में दिखाया गया रोबोटिक डॉग यूनिवर्सिटी के “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” ने खास इस कार्यक्रम के लिए बनाया है।

लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों ने जल्द ही दावा किया कि यह रोबोट यूनिवर्सिटी का बनाया हुआ नहीं है, बल्कि चीन की कंपनी Unitree Robotics का बना हुआ प्रोडक्ट है, जिसका नाम Unitree Go2 है और यह बाजार में पहले से बिक रहा है।

यूनिवर्सिटी ने मांगी माफी


जो चीज पहले यूनिवर्सिटी की उपलब्धि बताई जा रही थी, वही कुछ ही घंटों में “अंतरराष्ट्रीय स्तर की शर्मिंदगी” कहलाने लगी। मामला इतना बढ़ गया कि 16 से 21 फरवरी तक दिल्ली के भारत मंडपल में चल रहे इस कार्यक्रम से यूनिवर्सिटी को अपना स्टॉल खाली करने के लिए कहा गया।

18 फरवरी को यूनिवर्सिटी ने सार्वजनिक माफी जारी की। बयान में कहा गया कि रोबोट यूनिवर्सिटी की अपनी खोज नहीं है और संस्था ने ऐसा कभी दावा भी नहीं किया। साथ ही यह भी कहा गया कि पवेलियन पर मौजूद एक प्रतिनिधि को पूरी जानकारी नहीं थी और बिना अनुमति मीडिया से बात कर बैठी।

यूनिवर्सिटी के बयान में कहा गया कि कैमरे पर आने के उत्साह में प्रतिनिधि ने गलत जानकारी दे दी, जबकि उन्हें प्रेस से बात करने की अनुमति नहीं थी। आयोजकों की भावना का सम्मान करते हुए यूनिवर्सिटी ने स्टॉल खाली कर दिया।

सारा दोष एक महिला प्रोफेसर पर डाल दिया!

लेकिन माफी के इस बयान के बाद विवाद और बढ़ गया। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि यूनिवर्सिटी अपनी जिम्मेदारी से बच रही है और सारा दोष एक महिला प्रोफेसर पर डाल दिया गया है।

एक यूजर ने लिखा कि नेहा जी को बलि का बकरा बना दिया गया है। अगर उन्हें बोलने की अनुमति नहीं थी, तो फिर उन्हें वहां क्यों भेजा गया?

दूसरे यूजर ने कहा कि हमेशा महिलाओं को ही ऐसी सजा क्यों झेलनी पड़ती है?

कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रोफेसर खुद से मीडिया के पास चली गई थीं, या फिर उन्हें आधिकारिक तौर पर वहां रखा गया था? उनका कहना था कि अगर गलती हुई है तो संस्था को खुलकर जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

हालांकि कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने कहा कि अगर प्रतिनिधि ने नियमों के खिलाफ जाकर मीडिया से बात की, तो यह भी गलत है।

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि क्या यूनिवर्सिटी ने अपनी छवि बचाने के लिए एक व्यक्ति पर पूरा दोष डाल दिया, बजाय इसके कि इंटरनल कम्युनिकेशन और निगरानी की कमी को स्वीकार किया जाता।

क्या प्रोफेसर नेहा सिंह की नौकरी गई?

विवाद के बाद नेहा सिंह ने अपने लिंक्डइन प्रोफाइल पर “Open to Work” लिख दिया, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह नई नौकरी की तलाश में हो सकती हैं। इस कदम को भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा मिली और कई लोगों ने इसे इस बात का संकेत माना कि उन्हें पेशेवर नुकसान झेलना पड़ रहा है। कुछ ने दावा किया उन्हें शायद नौकरी से निकाल दिया गया है। हालांकि, यूनिवर्सिटी की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई।

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बड़े मंच के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में बाजार में मिलने वाले प्रोडक्ट को यूनिवर्सिटी की खुद की खोज बताना उसकी साख पर भारी पड़ गया है।

हालांकि यूनिवर्सिटी अब भी कह रही है कि उसने कभी रोबोट को अपनी खोज नहीं बताया, लेकिन टीवी इंटरव्यू, उसके बाद माफी और फिर स्टॉल खाली करने की घटना- इन सबने मिलकर विवाद को और बड़ा कर दिया है।

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