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114 राफेल से बढ़ेगी इंडियन एयरफोर्स की ताकत, भारत-फ्रांस डील के काफी के काफी करीब

Rafale deal : भारतीय वायु सेना के पास इस समय सिर्फ 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन बचे हैं। जबकि चीन और पाकिस्तान से एक साथ होने वाले खतरे का सही तरीके से मुकाबला करने के लिए वायु सेना को 42.5 स्क्वाड्रन की जरूरत मानी जाती है। आम तौर पर एक स्क्वाड्रन में 16 से 18 लड़ाकू विमान होते हैं। पिछले साल मिग-21 विमानों के रिटायर होने के बाद स्थिति और बिगड़ गई

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 10, 2026 पर 8:47 PM
114 राफेल से बढ़ेगी इंडियन एयरफोर्स की ताकत, भारत-फ्रांस डील के काफी के काफी करीब
Rafale deal : भारतीय वायु सेना में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या लगातार घट रही है।

Rafale deal :  भारतीय वायु सेना में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या लगातार घट रही है। इसी चिंता के बीच भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमानों की अगली खरीद को लेकर बातचीत तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि अगले महीने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से पहले इन वार्ताओं में और तेजी आ सकती है। भारतीय वायु सेना चाहती है कि लंबे समय से अटके मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कार्यक्रम के तहत एक अस्थायी समाधान के रूप में और राफेल विमान खरीदे जाएं। इसके लिए फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते पर जोर दिया जा रहा है। MRFA योजना के तहत कुल 114 आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद प्रस्तावित है, जिनमें से बड़ी संख्या भारत में विदेशी सहयोग से बनाने की योजना है।

जानकारी के मुताबिक, अंतिम फैसला रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की मंजूरी के बाद ही होगा। लेकिन वायु सेना ने साफ कर दिया है कि लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी को देखते हुए अतिरिक्त राफेल विमानों की तुरंत जरूरत है।

स्क्वाड्रन के नंबर्स को लेकर बढ़ी मुश्किल

भारतीय वायु सेना के पास इस समय सिर्फ 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन बचे हैं। जबकि चीन और पाकिस्तान से एक साथ होने वाले खतरे का सही तरीके से मुकाबला करने के लिए वायु सेना को 42.5 स्क्वाड्रन की जरूरत मानी जाती है। आम तौर पर एक स्क्वाड्रन में 16 से 18 लड़ाकू विमान होते हैं। पिछले साल मिग-21 विमानों के रिटायर होने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। इससे वायु सेना के पास मौजूद लड़ाकू विमानों की संख्या और कम हो गई। अधिकारियों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह कमी साफ नजर आई, जिससे यह चिंता बढ़ी कि किसी दो-तरफा खतरे की स्थिति में वायु सेना अपनी ताकत कैसे बनाए रखेगी।

मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) परियोजना करीब 7–8 साल पहले शुरू हुई थी और इसकी अनुमानित लागत 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। लेकिन प्रक्रियाओं में देरी और बदलती प्राथमिकताओं के कारण यह योजना अब तक आगे नहीं बढ़ पाई है। ऐसे में, पहले से वायु सेना में शामिल राफेल लड़ाकू विमान को इस कमी को जल्दी पूरा करने का सबसे तेज़ और व्यवहारिक विकल्प माना जा रहा है।

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