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पाकिस्तान को परमाणु शक्ति बनने देकर कांग्रेस ने की थी 'ऐतिहासिक भूल', असम CM हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा दावा

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, 'भारत के पास खतरे को वास्तविकता बनने से पहले खत्म करने की क्षमता और सहमति थी। फिर भी आखिरी मिनट में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया के डर से हिचकिचा गईं

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Jun 14, 2025 पर 10:47 PM
पाकिस्तान को परमाणु शक्ति बनने देकर कांग्रेस ने की थी 'ऐतिहासिक भूल', असम CM हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा दावा
सरमा ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने तब से 'परमाणु ब्लैकमेल' का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप को रोक दिया है

Himanta Biswa Sarma: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में कांग्रेस ने कार्रवाई न करते हुए पाकिस्तान को परमाणु शक्ति बनने की अनुमति देकर 'ऐतिहासिक भूल' की थी। सरमा ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने तब से 'परमाणु ब्लैकमेल' का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप को रोक दिया है।

मुख्यमंत्री हिमंत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट में कहा, 'आज जब राष्ट्र परमाणु खतरों को निष्प्रभावी करने के लिए निर्णायक रूप से कार्रवाई करते हैं, वहीं 1980 के दशक के दौरान भारत की दुखद निष्क्रियता एक चेतावनी भरी कहानी बनी हुई है कि क्या हो सकता था और क्या नहीं हुआ।' सरमा ने दावा किया कि खुफिया एजेंसी रॉ (R&AW) से मिली जानकारी ने पाकिस्तान के कहूटा में यूरेनियम संवर्धन की पुष्टि की थी।

इजराइल ने मदद की पेशकश की थी

अपनी पोस्ट जिसका शीर्षक था 'कांग्रेस की ऐतिहासिक भूल: कैसे भारत ने पाकिस्तान को परमाणु राष्ट्र बनने दिया', में सरमा ने दावा किया कि खुफिया जानकारी से लेकर संयुक्त हमले की योजना बनाने तक इजराइल ने मदद की पेशकश की थी। उन्होंने कहा कि जामनगर एयर बेस को लॉन्च साइट के रूप में चुना गया था और भारतीय सेना ने कहूटा पर एक पूर्व-खाली हमले का समर्थन किया था।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, 'भारत के पास खतरे को वास्तविकता बनने से पहले खत्म करने की क्षमता और सहमति थी। फिर भी आखिरी मिनट में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया के डर से हिचकिचा गईं।' उन्होंने आगे कहा कि राजीव गांधी ने बाद में 'विदेशी दबाव में निवारण पर कूटनीति को प्राथमिकता देते हुए योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया।' सरमा का यह बयान उस समय आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध हाल ही में संवेदनशील रहे है।

आपको बता दें कि, 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने 26 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंक के ठिकानों को निशाना बनाते हुए 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत बड़ी कार्रवाई की थी। इसमें 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए और कई पोस्ट तबाह किये गए। भारत के इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी परिस्थिति बन गई। पाकिस्तान ने भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन और मिसाइल अटैक किए हालांकि भारत ने सभी हमलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया। 3 दिन तक चले सैन्य संघर्ष के बाद पकिस्तन की तरफ से युद्ध विराम को लेकर बात चलाई गई जिस पर भारत सहमत हो गया।

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