India-Pakistan Ceasefire: नई दिल्ली ने चीन के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि उसने इस साल की शुरुआत में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के दौरान कोई मध्यस्थता वाली भूमिका निभाई थी। भारत ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद हुए सीजफायर समझौते में कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं था। CNN-News18 ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि नई दिल्ली ने चीन के उस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दी है कि उसने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की थी। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि दुश्मनी खत्म करने में किसी बाहरी देश की कोई भूमिका नहीं थी।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया था कि इस साल चीन द्वारा मध्यस्थता किए गए प्रमुख संवेदनशील मुद्दों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भी शामिल रहे। हालांकि, नई दिल्ली का यह कहना रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 7 से 10 मई के दौरान संघर्ष का समाधान दोनों देशों की सेनाओं के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMOs) के बीच सीधी बातचीत के माध्यम से हुआ था।
भारत लगातार यह कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान से संबंधित मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है। भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pok) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था।
बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर एक सिम्पोजियम में वांग ने कहा, "इस साल, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से किसी भी समय की तुलना में स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष अधिक बार भड़के। भू-राजनीतिक उथल-पुथल लगातार फैलती जा रही है।"
उन्होंने कहा, "स्थायी शांति स्थापित करने के लिए, हमने एक वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रुख अपनाया है, और लक्षणों और मूल कारणों दोनों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।" उन्होंने कहा, "गतिरोध वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए चीन के इस दृष्टिकोण का अनुसरण करते हुए, हमने उत्तरी म्यांमा, ईरान के परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फलस्तीन और इजराइल के मुद्दों तथा कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की।"
भारत सरकार के एक सूत्र ने इंडिया टुडे को बताया, "हमने पहले ही ऐसे दावों को खारिज कर दिया है। भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। हमारा रुख पहले भी कई बार साफ किया जा चुका है कि भारत-पाकिस्तान सीजफायर दोनों देशों के DGMOs के बीच सीधे बातचीत से तय हुआ था।"
कांग्रेस ने बुधवार को दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता संबंधी चीन का दावा चिंताजनक है। ऐसे में सरकार के स्तर पर इसमें स्पष्टता आनी चाहिए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने X पर पोस्ट किया, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने 10 मई, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया था। वह यह दावा कम से कम सात अलग-अलग देशों में, विभिन्न मंचों पर, 65 बार कर चुके हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तथाकथित अच्छे मित्र द्वारा किए गए इन दावों पर आज तक अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है। रमेश का कहना है, "अब चीन के विदेश मंत्री भी ऐसा ही दावा कर रहे हैं और कह रहे हैं कि चीन ने भी मध्यस्थता की थी। 4 जुलाई 2025 को सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत असल में चीन का सामना कर रहा था और उससे लड़ रहा था।"
कांग्रेस नेता के अनुसार, चीन निर्णायक रूप से पाकिस्तान के साथ खड़ा था। ऐसे में भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के चीन के दावे चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक सिर्फ इसलिए नहीं कि यह देश की जनता को अब तक बताई गई बातों के उलट हैं। बल्कि इसलिए भी कि यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का मजाक बनाता प्रतीत होता है।