थर थर कांपेगा दुश्मन, S-400 के लिए 288 और मिसाइलें आएंगी भारत, 10 हजार करोड़ की बड़ी डील तय

रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने रूस से 288 S-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इस सौदे की कीमत करीब दस हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) से कॉम्बैट मिसाइलों के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) मिलने के बाद भारत को रूस से और S-400 मिसाइलें मिलेंगी

अपडेटेड Feb 13, 2026 पर 3:20 PM
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S-400 Sudarshan Chakra : S-400 ने ऑपरेशन सिंदूर में PAK के छुड़ाए थे छक्के

भारत जल्द ही रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी संख्या में मिसाइलें खरीदने की तैयारी में है। रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने रूस से 288 S-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इस सौदे की कीमत करीब दस हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। सरकारी सूत्रों ने न्यूज18 को बताया है कि डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) से कॉम्बैट मिसाइलों के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) मिलने के बाद भारत को रूस से और S-400 मिसाइलें मिलेंगी।

सरकार का बड़ा फैसला 

ये नई मिसाइलें पहले से मौजूद S-400 सिस्टम को और मजबूत करने के लिए लाई जा रही हैं। फिलहाल भारत S-400 के तीन स्क्वाड्रन चला रहा है, जबकि रूस से दो और स्क्वाड्रन की डिलीवरी अभी बाकी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई DAC की बैठक में सेनाओं के अलग-अलग प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन प्रस्तावों की कुल अनुमानित लागत करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये बताई गई है। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से देश की रक्षा क्षमता और मजबूत होगी।


कॉम्बैट मिसाइलों के अलावा सरकार ने राफेल लड़ाकू विमान, 8I लॉन्ग रेंज मैरीटाइम रिकॉनिसेंस एयरक्राफ्ट और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (BMP-II) जैसे रक्षा प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। इन फैसलों का मकसद तीनों सेनाओं की ताकत बढ़ाना है।

ऑपरेशन सिंदूर में S-400  ने किया था कमाल

S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था। इस दौरान इस सिस्टम ने पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों को सफलतापूर्वक मार गिराया था। S-400 दुनिया के सबसे आधुनिक और लंबी दूरी तक मार करने वाले एयर डिफेंस सिस्टम में से एक है। इसे रूस की कंपनी अल्माज़-एंटे ने तैयार किया है। यह सिस्टम अलग-अलग ऊंचाई और दूरी पर आने वाले हवाई खतरों—जैसे लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल—को पहचान सकता है, उनका पीछा कर सकता है और उन्हें नष्ट कर सकता है। इस तरह S-400 भारत की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

मल्टी-टारगेट एंगेजमेंट की क्षमता

S-400 सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक साथ कई टारगेट पर नजर रख सकता है। इसमें मल्टी-टारगेट एंगेजमेंट क्षमता है, जिसके जरिए यह एक समय में 36 टारगेट तक ट्रैक कर सकता है। इसकी मिसाइलें करीब 400 किलोमीटर तक की दूरी और 0 से 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद खतरों को निशाना बना सकती हैं। यह स्टेल्थ विमान और तेज रफ्तार बैलिस्टिक मिसाइल जैसे मुश्किल लक्ष्यों को भी मार गिराने में सक्षम है।

यह सिस्टम सिर्फ पांच मिनट में सक्रिय हो सकता है, यानी जरूरत पड़ते ही तुरंत काम करना शुरू कर देता है। बताया जाता है कि यह पुराने रूसी सिस्टम के मुकाबले दोगुना ज्यादा असरदार है। S-400 को भारत की वायु सेना, थल सेना और नौसेना की यूनिट्स के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनता है। मोबाइल लॉन्चर पर लगे होने की वजह से इसे जल्दी एक जगह से दूसरी जगह तैनात किया जा सकता है। यह 4.8 किलोमीटर प्रति सेकंड तक की रफ्तार से आने वाले खतरों के खिलाफ तेज कार्रवाई करता है और बेहद सटीक निशाना साधता है।

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