AI Governance Guidelines: भारत सरकार ने देश की पहली व्यापक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) गवर्नेंस गाइडलाइंस जारी कर दी है। सरकार ने फिलहाल सख्त कानून बनाने के बजाय एक लचीला फ्रेमवर्क अपनाया है। इसका मकसद AI के खतरों जैसे कि पक्षपात, दुरुपयोग और पारदर्शिता की कमी को रोकना है, ताकि तकनीक के विकास की रफ्तार धीमी न हो। यह कदम आज से शुरू हुए पांच दिवसीय 'AI इम्पैक्ट समिट 2026' से ठीक पहले उठाया गया है।
'7 सूत्र' जो बनेंगे AI का आधार
सरकार ने इस फ्रेमवर्क को सात व्यापक सूत्रों या सिद्धांतों पर टिकाया है। ये सूत्र तय करेंगे कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और वित्त जैसे क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल कैसे होगा:
भरोसा: तकनीकी विकास की बुनियाद विश्वास पर होनी चाहिए।
पीपल फर्स्ट: तकनीक इंसानी फैसलों को बेहतर बनाने के लिए हो।
पाबंदी से ऊपर नवाचार: इनोवेशन को रोकने के बजाय उसे सही दिशा देना।
निष्पक्षता और समानता: AI सिस्टम किसी के साथ भेदभाव न करें।
जवाबदेही: मिसयूज होने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
पारदर्शी डिजाइन: जिससे सिस्टम को समझना आसान हो।
सुरक्षा और स्थिरता: तकनीक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हो।
नया कानून नहीं, मौजूदा नियमों का होगा सहारा
सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल किसी अलग AI कानून की जरूरत नहीं है। डेटा प्रोटेक्शन कानून और मौजूदा आईटी नियमों के जरिए ही कई जोखिमों को संभाला जा रहा है। हालांकि, तकनीक के बदलते स्वरूप को देखते हुए समय-समय पर रेगुलेटरी अपडेट किए जाएंगे। 'हाई-रिस्क' वाली एआई एप्लीकेशन, जो लोगों की सुरक्षा या अधिकारों को प्रभावित कर सकती हैं, उनके लिए ज्यादा सख्त नियम और इंसानी निगरानी अनिवार्य होगी।
निगरानी के लिए बनेंगे 3 नए संस्थान
गाइडलाइंस के तहत गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए तीन नई संस्थाओं के गठन का प्रस्ताव है:
AI गवर्नेंस ग्रुप: यह अलग-अलग मंत्रालयों के बीच नीतिगत तालमेल बिठाएगा।
तकनीकी और नीति विशेषज्ञ समिति: यह विशेषज्ञों की सलाह और इनपुट प्रदान करेगी।
AI सेफ्टी इंस्टीट्यूट: यह टेस्टिंग मानकों, सुरक्षा रिसर्च और रिस्क असेसमेंट पर ध्यान केंद्रित करेगा।
'विकसित भारत 2047' की ओर एक बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि AI की शक्ति सिर्फ कुछ कंपनियों या देशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इस नई नीति के जरिए भारत खुद को केवल एक उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि 'जिम्मेदार एआई' के वैश्विक नेता के रूप में पेश करना चाहता है। 'दिल्ली डिक्लेरेशन' के साथ, यह समिट भारत को दुनिया भर में AI के सेफ और इंक्लूसिव उपयोग की आवाज बनाने का काम करेगा।