एग्रीकल्चरल गुड्स और डेयरी आइटम्स भारत-अमेरिका ट्रेड डील से बाहर रह सकते हैं। भारत इन दोनों सेक्टर को संवेदनशील मानता है। भारत का जोर शुरू से ही इन दोनों सेक्टर को ट्रेड डील के दायरे से बाहर रखने पर रहा है। सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका के साथ डील में भी इन दोनों सेक्टर के शामिल नहीं होने की संभावना है।
एग्रीकल्चर और डेयरी को लेकर भारत का रुख पहले जैसा
अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, "भारत को जो रुख पहले था, वह अभी भी है। एग्रीकल्चर और डेयरी से जुड़े संवेदनशील आइटम्स के डील से बाहर रहने की उम्मीद है।" भारत का जोर दूसरे देशों के साथ भी ट्रेड डील में इन दोनों सेक्टर को बाहर रखने पर रहा है। यूनाइटेड किंग्डम, न्यूजीलैंड और यूरोपयीय यूनियन के साथ भी ट्रेड डील में इन दोनों सेक्टर्स को बाहर रखने पर भारत का जोर था।
ट्रंप ने 2 फरवरी को भारत के साथ डील का ऐलान किया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी को भारत के साथ डील का ऐलान किया। उन्होंने इस बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर लिखा कि इस एग्रीमेंट से 2025 के मध्य में भारत पर लगाए गए टैरिफ में काफी कमी आएगी। अमेरिका ने भारत पर टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने का ऐलान किया है। भारत में आयातित अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर टैरिफ घटकर जीरो हो जाएगा।
दोनों पक्ष ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे
सरकार के अधिकारी ने बताया कि भारत और अमेरिका के अधिकारी ट्रेड डील के डॉक्युमेंट्स को फाइनल रूप दे रहे हैं। यह अभी पता नहीं है कि ट्रेड डील भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) का पहला हिस्सा होगा या यह पूरा बीटीए होगा। इस बारे में दोनों पक्षों की बातचीत जल्द फरवरी में जल्द शुरू होने वाली है।
भारत एग्री और डेयरी को डील से क्यों बाहर रखना चाहता है?
भारत का मानना है कि एग्रीकल्चरल और डेयरी ऐसे सेक्टर्स हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इन सेक्टर्स में विदेशी आइट्म्स के आयात की इजाजत देने से लोगों के जीविकोपार्जन पर असर पड़ेगा। भारत में आज भी कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों पर बड़ी संख्या में लोग रोजोरोटी के लिए निर्भर हैं।