भारत और अमेरिका के बीच सोमवार को ट्रेड डील का ऐलान हो गया है। धानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सोमवार रात टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा की। उन्होंने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि अब अब भारत पर 50% नहीं, बल्कि 18% टैरिफ ही लगेगा। टैरिफ घटना के लिए पीएम मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट कर ट्रंप को धन्यवाद दिया है। वहीं भारत अमेरिका ट्रेड डील पर सहमति बनने के ट्रंप के एलान के बाद अमेरिकी कृषि मंत्री ने जो प्रतिक्रिया दी है उस पर भारत में चर्चा हो रही है। वहीं भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, भारत–अमेरिका के ऐतिहासिक ट्रेड समझौते में किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी।
डील से बाहर होंगे कृषि और डेयरी क्षेत्र
इंडिया टुडे ने सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि, भारत–अमेरिका के ऐतिहासिक ट्रेड समझौते में किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी। नए समझौते के तहत भले ही वेनेजुएला से कच्चे तेल जैसी रणनीतिक ऊर्जा की खरीद शामिल हो, लेकिन इससे किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा। सूत्रों ने साफ किया कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा पहले की तरह बनी रहेगी। बातचीत के दौरान इन अहम क्षेत्रों से जुड़े सुरक्षा उपायों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया गया है। सरकार इन क्षेत्रों को सुरक्षित रखते हुए ही समझौते के तहत बाजार तक बेहतर पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।
इस समझौते के तहत भारत और अमेरिका एक-दूसरे के सामान पर आपसी टैरिफ घटाएंगे। अमेरिका भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। इससे भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में ज्यादा मौके मिलेंगे। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकारी सूत्रों ने साफ कहा है कि भारत कच्चा तेल उन्हीं देशों से खरीदेगा, जिन पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं हैं। यह खरीदारी मौजूदा बाजार कीमतों के हिसाब से वैश्विक स्तर पर की जाएगी।
वेनेजुएला से तेल खरीदागा भारत
सूत्रों ने बताया कि जब वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगे हुए थे, तब भारत ने वहां से तेल नहीं खरीदा था। अब जब प्रतिबंध हटा लिए गए हैं, तो भारत वहां से कच्चा तेल खरीद सकता है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस समझौते से आर्थिक फायदे मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा, जो आने वाले वर्षों में 500 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ये सभी कदम संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में उठाए जा रहे हैं। साथ ही सरकार इस बात का भी ध्यान रख रही है कि देश की घरेलू प्राथमिकताओं और हितों की पूरी सुरक्षा बनी रहे। सूत्रों ने कहा कि जैसे-जैसे इस समझौते को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, उससे जुड़ी और जानकारियां समय-समय पर साझा की जाएंगी।