India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील फाइनल हो चुकी है। मनीकंट्रोल के विश्लेषण के अनुसार, इस नए व्यापार समझौते से भारत के उन निर्यातों को बड़ी राहत मिलेगी, जो अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% भारी आयात शुल्क के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए थे। ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ बातचीत के बाद इस शुल्क को घटाकर 18% करने का ऐलान किया है। आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर से नवंबर के बीच अमेरिका को होने वाले कुल $19 बिलियन के निर्यात में से लगभग एक-तिहाई हिस्सा ($6 बिलियन से अधिक) ऐसा था, जिसमें टैरिफ बढ़ने के बाद 30% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी। अब टैक्स कम होने से इन उत्पादों की कीमतें फिर से प्रतिस्पर्धी होंगी और निर्यात में तेजी आएगी।
हीरे और गहनों के कारोबार पर पड़ी थी सबसे बड़ी मार
टैरिफ बढ़ने का सबसे भयानक असर रत्न और आभूषण क्षेत्र पर पड़ा था। विश्लेषण से पता चलता है कि गैर-औद्योगिक हीरों का निर्यात 96% तक गिर गया, जो $156 मिलियन से घटकर मात्र $14.4 मिलियन रह गया था। इसी तरह, तराशे और पॉलिश किए गए हीरों के निर्यात में भी 74% की भारी गिरावट देखी गई, जबकि यह अमेरिका को होने वाले भारत के सबसे बड़े निर्यात श्रेणियों में से एक है। सोने के गहनों के शिपमेंट में भी लगभग 50% की कमी आई थी, लेकिन अब शुल्क घटने से इस क्षेत्र के व्यापारियों को अपनी पुरानी चमक वापस पाने की उम्मीद जगी है।
बासमती चावल और खाद्य उत्पादों का निर्यात हुआ था ठप
ऊंचे टैरिफ ने भारत के कृषि और खाद्य निर्यात को लगभग शून्य पर ला खड़ा किया था। पिछले साल की तुलना में बासमती चावल का निर्यात गिरकर शून्य हो गया, जो पहले $83 मिलियन के करीब था। पोंफ्रेट मछली, मक्का और सूखे पास्ता जैसे उत्पादों के निर्यात में भी 70% से अधिक की गिरावट आई। सर्दियों के कपड़ों, जैसे ऊनी जैकेट और ब्लेज़र की मांग भी इस दौरान 35% कम रही क्योंकि टैक्स की वजह से उनकी कीमतें अमेरिकी ग्राहकों की पहुंच से बाहर हो गई थीं। अब 18% टैरिफ लागू होने से ये सभी उत्पाद फिर से अमेरिकी सुपरमार्केट की शोभा बढ़ा सकेंगे।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र रहा बेअसर, स्मार्टफोन निर्यात में भारी उछाल
दिलचस्प बात यह है कि जहां कई पारंपरिक क्षेत्र संघर्ष कर रहे थे, वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात पर ऊंचे टैरिफ का कोई खास असर नहीं पड़ा। इस दौरान स्मार्टफोन के निर्यात में 217% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पर्सनल कंप्यूटर का निर्यात 400% से अधिक बढ़ा। इसने साबित किया कि ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका और कुछ खास श्रेणियों की मजबूत मांग ने उन्हें टैक्स की मार से बचाए रखा। कुल मिलाकर, सितंबर-नवंबर के दौरान भारत का कुल निर्यात केवल 1% गिरा था, और अब इस नई डील के बाद रुके हुए ऑर्डर्स वापस आने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा बूस्ट मिलेगा।