भारत का वो गांव जहां घरों में नहीं लगते दरवाजे! फिर भी नहीं होती चोरी, 300 साल पुरानी परंपरा आज भी जिंदा

गांव के लोग कहते हैं कि उन्हें चोरी का कोई डर नहीं है। उनका मानना है कि जो भी चोरी करेगा, उसे तुरंत सजा मिलेगी- जैसे आंखों की रोशनी चली जाना या लगातार बदकिस्मती झेलना। यह गांव देखने के लिए हर दिन करीब 40,000 लोग आते हैं। लोग यहां के मंदिर और इस अनोखी जीवनशैली को करीब से देखने पहुंचते हैं

अपडेटेड Apr 25, 2026 पर 8:51 PM
Story continues below Advertisement
भारत का वो गांव जहां घरों में नहीं लगते दरवाजे! फिर भी नहीं होती चोरी, 300 साल पुरानी परंपरा आज भी जिंदा

भारत में एक ऐसा गांव है जहां दरवाजा बंद करना तो दूर, दरवाजे लगाना ही परंपरा के खिलाफ माना जाता है। महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर गांव में आज भी कई घर बिना दरवाजों के बने हैं। यहां लोग अपने घरों में ताला नहीं लगाते। गहने, पैसे और रोजमर्रा का सामान भी खुले में रखा रहता है, जो आज के समय में किसी को भी हैरान कर सकता है। इस अनोखी परंपरा की शुरुआत करीब 300 साल पुरानी एक मान्यता से जुड़ी है।

कहानी के मुताबिक, एक बार भारी बारिश के बाद पास की पनस्नाला नदी के किनारे एक काला पत्थर मिला। जब गांव वालों ने उसे छुआ, तो उन्हें लगा कि उसमें से खून निकल रहा है। उसी रात गांव के मुखिया को सपना आया, जिसमें शनि देव ने बताया कि वह पत्थर उनका स्वरूप है और वे गांव की रक्षा करेंगे।

लेकिन इसके साथ एक शर्त भी थी- इस मूर्ति को कभी छत के नीचे नहीं रखा जाएगा, ताकि शनि देव बिना किसी रुकावट के पूरे गांव पर नजर रख सकें।


इसके बाद उस पत्थर को खुले चबूतरे पर स्थापित किया गया और धीरे-धीरे लोगों ने अपने घरों में दरवाजे और ताले लगाना छोड़ दिया। उन्हें विश्वास था कि अगर कोई चोरी या गलत काम करेगा, तो उसे तुरंत सजा मिलेगी।

आज भी कई घरों में सिर्फ लकड़ी के पट्टे या पर्दे लगाए जाते हैं, वो भी सिर्फ जानवरों को बाहर रखने के लिए, सुरक्षा के लिए नहीं।

पुलिस स्टेशन और बैंक में भी नहीं दरवाजा!

यह परंपरा सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। यहां 2015 में बना पुलिस स्टेशन भी बिना मेन गेट के बताया जाता है, और 2011 में खुली बैंक शाखा में भी ताले की व्यवस्था बहुत कम थी, ताकि गांव की परंपरा बनी रहे।

गांव के लोग कहते हैं कि उन्हें चोरी का कोई डर नहीं है। उनका मानना है कि जो भी चोरी करेगा, उसे तुरंत सजा मिलेगी- जैसे आंखों की रोशनी चली जाना या लगातार बदकिस्मती झेलना।

यह गांव देखने के लिए हर दिन करीब 40,000 लोग आते हैं। लोग यहां के मंदिर और इस अनोखी जीवनशैली को करीब से देखने पहुंचते हैं।

हालांकि, समय के साथ कुछ बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। अब कुछ नए लोग घरों में दरवाजे और ताले लगाने की अनुमति मांगने लगे हैं, जो बदलती सोच को दिखाता है।

फिर भी, शनि शिंगणापुर में आज भी ज्यादातर लोग बिना ताले-दरवाजे के रहते हैं। यहां की पूरी व्यवस्था किसी आधुनिक सुरक्षा सिस्टम पर नहीं, बल्कि सिर्फ विश्वास और परंपरा पर टिकी हुई है।

Shani Jayanti 2026: शनि जयंति के साथ बन रहा ये दुर्लभ संयोग, साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत पाने के लिए करें ये उपाय

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।