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भारत में क्यों गहराया हवाई यात्रा का संकट, क्या अन्य देशों की तुलना में अधिक काम करते हैं भारतीय पायलट? जानिए

Indigo Crisis Explainer: इंडिगो प्रतिदिन 2,200 उड़ानें संचालित करती है, 20 साल के अपने इतिहास में सबसे बुरे संकट से गुजर रही है। भारतीय फ्लाइट ऑपरेशन में इंडिगो की मार्केट हिस्सेदारी 65% है। एयर इंडिया के साथ मिलकर ये दोनों कंपनियां 92% बाजार को नियंत्रित करती हैं

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Dec 09, 2025 पर 9:26 AM
भारत में क्यों गहराया हवाई यात्रा का संकट, क्या अन्य देशों की तुलना में अधिक काम करते हैं भारतीय पायलट? जानिए
पायलटों की कमी के कारण 2 दिसंबर से अब तक करीब 5000 उड़ानें रद्द हो चुकी हैं

Indigo Crisis: भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो में पिछले एक सप्ताह से चल रहे परिचालन संकट ने देश की हवाई यात्रा को पूरी तरह बाधित कर दिया है। पायलटों की कमी के कारण 2 दिसंबर से अब तक करीब 5000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी है। इस संकट ने न केवल यात्रियों को मुश्किल में डाला है, बल्कि भारतीय पायलटों की कामकाजी परिस्थितियों और वेतन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए आपको बताते हैं दुनिया के अन्य देशों की तुलना में कैसी है भारतीय पायलटों की स्थिति।

इंडिगो प्रतिदिन 2,200 उड़ानें संचालित करती है, 20 साल के अपने इतिहास में सबसे बुरे संकट से गुजर रही है। भारतीय फ्लाइट ऑपरेशन में इंडिगो की मार्केट हिस्सेदारी 65% है। एयर इंडिया के साथ मिलकर ये दोनों कंपनियां 92% बाजार को नियंत्रित करती हैं। कई छोटे शहरों के लिए इंडिगो एकमात्र संपर्क सूत्र है, जिसने संकट के प्रभाव को और गंभीर बना दिया। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में 2-3 दिनों तक हजारों यात्री फंसे रहे।

मांग में आई अचानक वृद्धि के कारण टिकट की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई, जिसके बाद सरकार को घरेलू हवाई किराए की अधिकतम सीमा तय करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। 5 दिसंबर को लगभग 1,600 उड़ानें रद्द हुईं, जिसके बाद अगले दिनों में भी यह संख्या 700, 650 और 400 से अधिक बनी रही। एयरलाइन का दावा है कि परिचालन 15 दिसंबर तक सामान्य हो जाएगा।

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