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Kathua Encounter: जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, जैश के 3 पाकिस्तानी आतंकी गांव में छिपे

Kathua Encounter: अधिकारियों ने बुधवार (7 जनवरी) को बताया कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के एक दूरदराज के गांव में सुरक्षा बलों और पाकिस्तान समर्थित माने जा रहे आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, शाम करीब चार बजे बिलावर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत कमाध नाला में स्थानीय लोगों ने एक आतंकवादी को देखा

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jan 07, 2026 पर 8:24 PM
Kathua Encounter: जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, जैश के 3 पाकिस्तानी आतंकी गांव में छिपे
Kathua Encounter: सुरक्षा बलों ने दो-तीन आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना के बाद तलाशी अभियान चलाया

Kathua Encounter: जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के एक दूरदराज के गांव में बुधवार (7 जनवरी) शाम को सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। एक अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ बुधवार शाम बिलावर के काहोग गांव में शुरू हुई। सुरक्षा बलों ने दो-तीन आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना के बाद तलाशी अभियान चलाया। जम्मू के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस भीम सेन टूटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "एसओजी कठुआ ने कठुआ के कमाध नाला के जंगल में आतंकवादियों से मुठभेड़ की है।"

सूत्रों ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि शाम करीब चार बजे बिलावर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत कमाध नाला में स्थानीय लोगों ने एक आतंकवादी को देखा। सूत्रों ने कहा, "यह वही आतंकवादी हो सकता है जिसे आज (7 जनवरी) सुबह धन्नू पैरोल पर देखा गया था।" अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान समर्थित माने जा रहे आतंकवादियों को मार गिराने के लिए अतिरिक्त बल को गांव में भेजा गया है।

हिंदुस्तान टाइम्स को अधिकारियों ने बताया, "जैशे-मोहम्मद से जुड़े तीन आतंकवादी शायद छिपे हुए हैं। अभी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में लगे हुए हैं।" इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि जम्मू और कश्मीर पुलिस ने बुधवार को साइबर आतंकवाद के एक मामले की जांच के सिलसिले में घाटी में कई जगहों पर छापे मारे।

अधिकारियों ने बताया कि जम्मू और कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) विंग ने फर्जी अकाउंट्स के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई शुरू की है। पुलिस ऐसे अकाउंट्स पर शिकंजा कस रही है जिनका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड और टेरर फाइनेंसिंग को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।

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