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भारत के लिए एक और खुशखबरी...होर्मुज पार कर गए दो और टैंकर, ईरान ने दिया रास्ता

ईरान ने भारत के तेल और एलपीजी लदे जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने की इजाजत दे दी है। शनिवार को भारत की ओर जा रहे दो और एलपीजी टैंकरों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब ईरान ने कहा है कि चल रहे तनाव के बीच भारत समेत चार “मित्र देशों” को इस रास्ते से अपने जहाज ले जाने की अनुमति दी जाएगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 28, 2026 पर 7:00 PM
भारत के लिए एक और खुशखबरी...होर्मुज पार कर गए दो और टैंकर, ईरान ने दिया रास्ता
ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले का आज एक महीने का वक्त पूरा हो चुका है।

ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले का आज एक महीने का वक्त पूरा हो चुका है। वहीं बीते एक महीने से जारी इस जंग का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। भारत समेत पूरी दुनिया में क्रूड ऑयल और एलपीजी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। वहीं ईरान जंग के बीच भारत को एक और बड़ी खुशखबरी मिली है। जिस होर्मुज में पूरी दुनिया के जहाज फंसे हैं, वहां से भारत आसानी से अपने जहाज बारी-बारी से निकाल रहा है। शनिवार को भारत की ओर जा रहे दो और एलपीजी टैंकरों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार कर लिया।

भारत को मिली इजाजत 

ईरान ने भारत के तेल और एलपीजी लदे जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने की इजाजत दे दी है। शनिवार को भारत की ओर जा रहे दो और एलपीजी टैंकरों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब ईरान ने कहा है कि चल रहे तनाव के बीच भारत समेत चार “मित्र देशों” को इस रास्ते से अपने जहाज ले जाने की अनुमति दी जाएगी। शिपिंग से जुड़े ताजा आंकड़ों के अनुसार, BW ELM और BW TYR नाम के ये टैंकर उस “हाई-रिस्क कॉरिडोर” से गुजरे हैं, जो संघर्ष शुरू होने के बाद से लगभग बंद पड़ा था। अब ये दोनों जहाज़ आगे बढ़ते हुए ओमान की खाड़ी की तरफ जा रहे हैं।

भारत का झंडा लगे ये दोनों टैंकर, एक-दूसरे के काफी करीब चलते हुए होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बाहर निकले। इन दोनों टैंकर में 90,000 टन से ज्यादा एलपीजी भरी हुई है। इसके अलावा करीब पांच और भारतीय टैंकर—जिनमें ज्यादातर कच्चा तेल भरा है—अभी भी संयुक्त अरब अमीरात के पास समुद्री क्षेत्र में खड़े हैं और जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि, यह वही अहम रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल तेल का करीब पांचवां हिस्सा होकर गुजरता है, इसलिए यहां की स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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