IT Sector WFH: मिडिल में जारी युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'Work From Home' (WFH) की अपील ने आईटी सेक्टर में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां कर्मचारी यूनियनें इसे 'राष्ट्रीय जिम्मेदारी' मानकर अनिवार्य वर्क फ्रॉम होम की मांग कर रही हैं, वहीं आईटी कंपनियां फिलहाल अपने मौजूदा 'हाइब्रिड मॉडल' को बदलने के मूड में नहीं दिख रही हैं।
पीएम मोदी की अपील और कंपनियों का रुख
प्रधानमंत्री ने बीते दिनों देशवासियों से ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा के लिए वर्क फ्रॉम होम अपनाने का आग्रह किया था। उनके इस अपील पर आईटी सेक्टर के दिग्गजों और नैसकॉम (Nasscom) का कहना है कि उन्होंने पिछले 3 साल की कड़ी मशक्कत के बाद 'हाइब्रिड वर्क कल्चर' (हफ्ते में 2-3 दिन ऑफिस) को स्थिर किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां अभी सख्त ऑफिस अटेंडेंस नियम तो लागू नहीं करेंगी, लेकिन पूरी तरह से घर से काम (Permanent WFH) शुरू करने में भी जल्दबाजी नहीं दिखाएंगी।
TCS-Infosys में अभी क्या हैं नियम?
देश की दो सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में काम करने के तरीके अलग-अलग हैं:
Infosys: कंपनी पहले से ही काफी लचीली है। यहां कर्मचारियों को महीने में केवल 10 दिन ऑफिस आना अनिवार्य है। कंपनी इसे अपने सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों से भी जोड़कर देखती है।
TCS: यहां नियम थोड़े सख्त हैं। टीसीएस फिलहाल 5 दिन ऑफिस मॉडल पर काम कर रही है। मैनेजर की अनुमति से महीने में केवल 2 दिन घर से काम करने की छूट मिलती है।
कर्मचारी यूनियनों की 'अनिवार्य WFH' की मांग
आईटी कर्मचारी यूनियनों ने इस मुद्दे पर सरकार को पत्र लिखा है। आईटी यूनियन 'नासेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट' (NITES) ने श्रम मंत्रालय को पत्र लिखकर अपील की है कि सभी आईटी कंपनियों के लिए 'अनिवार्य वर्क फ्रॉम होम' की एडवाइजरी जारी की जाए। उन्होंने इसे पीएम मोदी का 'राष्ट्रीय आह्वान' बताया है।
दूसरी यूनियन 'FITE' का कहना है कि सिर्फ भाषण से काम नहीं चलेगा। जब तक आईटी मंत्रालय या पीएमओ (PMO) से कोई आधिकारिक आदेश नहीं आता, कंपनियां इसे गंभीरता से नहीं लेंगी।
क्या हाइब्रिड मॉडल ही है समाधान?
इंडस्ट्री बॉडी नैसकॉम ने एक बयान में कहा कि भारतीय टेक इंडस्ट्री पहले से ही हाइब्रिड मॉडल पर चल रही है। ग्राहकों की जरूरतों और प्रोजेक्ट की गोपनीयता को देखते हुए ही ऑफिस बुलाने या घर से काम देने का फैसला किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध और गहराता है, तो कंपनियां ऑफिस आने की अनिवार्यता में ढील दे सकती हैं ताकि ईंधन की बचत हो सके और सार्वजनिक नाराजगी से बचा जा सके।