नर्मदा नदी के किनारे बने बरगी डैम की शांत लहरें गुरुवार शाम अचानक चीखों और अफरा-तफरी में बदल गईं। जबलपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर यह खूबसूरत जगह एक दर्दनाक हादसे की गवाह बन गई, जिसने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। राहत और बचाव दल, जिसमें सेना भी शामिल है- पानी में लगातार तलाश कर रहे थे। तभी एक ऐसा मंजर सामने आया, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। नौवां शव मिला… एक मां का, जिसने अपने तीन साल के मासूम बच्चे को छाती से लगाया हुआ था। मां और बेटा दोनों एक ही लाइव जैकेट पहने हुए थे।
दोनों ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी, लेकिन मां ने आखिरी सांस तक अपने बच्चे को नहीं छोड़ा। जब दोनों के शव किनारे लाए गए, तो वहां मौजूद रेस्क्यू टीम के जवान भी खुद को संभाल नहीं पाए। इस दृश्य ने कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह की आंखों में भी आंसू ला दिए।
करीब 20 फीट गहरे पानी में डूबी क्रूज बोट तक पहुंचने के लिए गोताखोर, नावें और भारी मशीनें लगातार जुटी हुई हैं। कोशिश है कि किसी तरह इस डूबी हुई नाव को किनारे के पास लाया जाए और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचा जाए।
यह हादसा उस वक्त हुआ जब मध्य प्रदेश टूरिज्म की एक क्रूज बोट, जिसमें 40-45 लोग सवार थे, अचानक आए तूफान का शिकार हो गई। करीब 40 Km प्रति घंटे की तेज हवाएं और मूसलाधार बारिश ने कुछ ही मिनटों में नाव का संतुलन बिगाड़ दिया और वह पानी में समा गई।
शुक्रवार तक 9 शव निकाले जा चुके हैं। गुरुवार को 28 लोगों को बचा लिया गया था, लेकिन अब भी कितने लोग लापता हैं- इसका सही आंकड़ा किसी के पास नहीं है। अधिकारियों को डर है कि कई लोग अब भी उस डूबी हुई नाव के अंदर फंसे हो सकते हैं।
बचे हुए लोगों की कहानी हालात की भयावह तस्वीर पेश करती है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि नाव में निकलने से पहले कोई सही सुरक्षा जांच नहीं हुई थी। लाइफ जैकेट भी या तो थीं नहीं, या फिर तब दी गईं जब नाव डूबने लगी।
सबसे पहले मदद के लिए स्थानीय गांव वाले दौड़े। उन्होंने पानी में रस्सियां फेंककर लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की- कई जिंदगियां उसी कोशिश से बच पाईं।
शुरुआत में अंधेरा और खराब मौसम राहत कार्य में बाधा बने, लेकिन अब अभियान तेज कर दिया गया है। SDRF की टीमों के साथ भारतीय सेना, पैरामिलिट्री फोर्स और एक खास हेलीकॉप्टर भी इस ऑपरेशन में जुटा है।
इस त्रासदी के बीच कुछ कहानियां दिल को और तोड़ देती हैं। खमरिया ऑर्डनेंस फैक्ट्री के एक परिवार के करीब 15 लोग इस सैर पर गए थे। लेकिन अब तक सिर्फ एक छोटा बच्चा ही जिंदा मिल पाया है। उसके पिता कमराज आर्य, मां और एक भाई अब भी लापता हैं।
समय के खिलाफ दौड़ जारी है। मशीनों से पानी में रास्ता बनाने की कोशिश हो रही है, ताकि नाव के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचा जा सके।
नर्मदा के किनारे आज सन्नाटा पसरा है। कुछ परिवार खामोशी से बैठे हैं, आंखों में उम्मीद और दिल में डर लिए… लेकिन उस मां और उसके बच्चे की तस्वीर- जो मौत के बाद भी एक-दूसरे से अलग नहीं हुए, अब हर किसी के दिल में हमेशा के लिए बस गई है।