उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से अवैध धर्मांतरण का बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार किया है। दोनों इसी होटल से अवैध धर्मांतरण का रैकेट चला रहे थे। मामले के खुलासे के बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश मिला। गुरुवार को यूपी एटीएस ने दोनों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। इस दौरान उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
छांगुर बाबा सफेद धोती-कुर्ता और टोपी पहने नजर आया, जबकि नीतू उसके साथ थी। दोनों के हाव-भाव में बदलाव साफ दिखा। पहले जो अपने दबदबे और रसूख के कारण पुलिस-प्रशासन को अपने पास बुलाता था, अब वो खुद ATS के सामने सवालों के जवाब दे रहा है। अगले सात दिन तक दोनों से पूछताछ की जाएगी।
बलरामपुर के जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा पिछले करीब 15 सालों से सुनियोजित तरीके से अवैध धर्मांतरण का रैकेट चला रहा था। जांच में पता चला है कि उसका कनेक्शन पूर्वांचल के कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी गैंग से भी जुड़ा हुआ है। मुख्तार अंसारी के साथ मिलकर छांगुर ने बड़े पैमाने पर धर्मांतरण और जमीन के अवैध कारोबार को अंजाम दिया।
यूपी एटीएस की जांच जारी है और उन्हें सात दिन की रिमांड पर रखा गया है। ATS चीफ अमिताभ यश ने बताया कि छांगुर विदेश से धर्मांतरण के लिए फंडिंग लेता था, जिसका इस्तेमाल वह जमीन खरीदने और आलीशान कोठियां बनाने में करता था। बलरामपुर के उतरौला में उसने एक सिंधी परिवार का धर्मांतरण करवाकर उनकी जमीन पर भव्य कोठी बनवाई। इस कोठी में विदेशी बाथरूम फिटिंग्स, घोड़े और छह जर्मन शेफर्ड कुत्ते भी थे।
पूछताछ में यह भी पता चला कि छांगुर लोगों का ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण करवाता था। जो विरोध करते थे, उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करवा कर डराता था और फिर जबरन धर्म परिवर्तन करवाता था। उसकी कोठी में 40 कमरे थे, जिनमें से केवल तीन ही सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए थे, बाकी कमरे बेहद गुप्त रखे गए थे। ATS छांगुर के नेटवर्क, विदेशी फंडिंग, माफिया कनेक्शन और अन्य संपत्तियों की जांच कर रही है।
साथ ही, इस मामले में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में कुछ वकीलों और मोहम्मद अहमद नाम के शख्स की संलिप्तता भी सामने आई है। ईडी को FIR सौंप दी गई है ताकि मनी लॉन्ड्रिंग की दिशा में जांच शुरू हो सके।
बलरामपुर के जलालुद्दीन को बचपन से ही छांगुर कहा जाता है, क्योंकि उसके बाएं हाथ में छह उंगलियां हैं। बड़े होने पर उसने कपड़े बेचने का धंधा शुरू किया और गांव-गांव जाकर अंगूठियां और नग बेचकर अपनी पहचान बनाई। बाद में उसने पत्नी को पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बनाया, जो जीत गई। इसके बाद इलाके में उसका नाम और रसूख बढ़ने लगा। पैसों से लोगों की मदद करके उसने खुद को पीर बाबा घोषित कर लिया।
धर्मांतरण के खेल की शुरुआत उसने इसी नाम और दिखावे से की। विदेशी फंडिंग के कारण उसका लाइफ स्टाइल और प्रभाव बढ़ा। वह स्थानीय प्रशासन को भी अपने नियंत्रण में रखता था। किसी ने विरोध किया तो छांगुर और उसके लोगों ने झूठे मुकदमे दर्ज करा दिए।
छांगुर की आलीशान कोठी और बुलडोजर कार्रवाई
बलरामपुर में छांगुर ने 40 कमरों वाली बड़ी कोठी बनवाई थी। इसमें से सिर्फ तीन कमरे आम लोगों के लिए खुले थे, बाकी निजी थे। हाल ही में 2 जुलाई को विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने 15 लोगों की घर वापसी कराई थी, जिनमें से कई छांगुर के धर्मांतरण के शिकार थे।
बलरामपुर प्रशासन ने छांगुर की कोठी पर दो दिनों तक बुलडोजर चलाया। बुधवार को 1500 स्क्वायर फीट का अवैध निर्माण तोड़ा गया। कुल 2041 स्क्वायर फीट में से अब 500 स्क्वायर फीट की तोड़-फोड़ जारी है। कोठी के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है।