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अब सबकुछ ट्रांसपैरेंट, बदल दिया कम्युनिकेशन मिनिस्ट्री का हुलिया! संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक अनूठा प्रयोग

संचार मंत्री का पद संभालने का बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया जब संचार मंत्रालय पहुंचे तो इसे चारो तरफ से इतना बंद पाया। संचार मंत्रालय में मंत्री के कार्यालय स्थित कमरे का आलम ये था कि कहीं से हवा धूप पहुंच ही नहीं पाती थी। ऊपर से कमरे के अंदर ही एक कमरा रेस्ट रुम भी बनाया हुआ था जो दशको से चला आ रहा था। चारो तरफ इतने ज्यदा फर्नीचर लगे थे कि खाली स्थान नजर नहीं आता था

Amitabh Sinhaअपडेटेड May 22, 2026 पर 2:40 PM
अब सबकुछ ट्रांसपैरेंट, बदल दिया कम्युनिकेशन मिनिस्ट्री का हुलिया! संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक अनूठा प्रयोग
संचार मंत्री का पद संभालने के बाद सिंधिया ने अपने इस कार्यालय कुछ ऐसा कायाकल्प किया है कि कर्मचारी भी तारीफ करते नही थक रहे

सरकार की पारदर्शिता तो पीएम मोदी सरकार की पहचान बन गयी है। लेकिन इसी पारदर्शिता का एक ऐसा उदाहरण है जो वाकई आम आदमी को अचरज में जरुर डाल देगा। इस पूरी तरह से पारदर्शी कमरे की तस्वीर को देखिए। शीशे के अंदर बैठा मंत्री क्या कर रहा है ये वहां से गुजरता हर कर्मचारी और मंत्री से मिलने पहुंचा हर व्यक्ति देख सकता है। अब कहा तो ये भी जा सकता है कि अंदर बैठा मंत्री बाहर चल रही हर हरकत पर नजर पर रख रहा है। आलम ये है कि अगर कोई मिलने वाला बाहर से इशारा भी कर दे तो मंत्री चाहे तो उसे अंदर बुलाकर दो बातें कर सकता है। जी हां—-हम बात कर हैं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संचार भवन के कार्यालय की। संचार मंत्री का पद संभालने के बाद सिंधिया ने अपने इस कार्यालय कुछ ऐसा कायाकल्प किया है कि कर्मचारी भी तारीफ करते नही थक रहे कि ऐसा खुला दरबार नहीं देखा।

पद संभालने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया ये बदलाव

संचार मंत्री का पद संभालने का बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया जब संचार मंत्रालय पहुंचे तो इसे चारो तरफ से इतना बंद पाया। संचार मंत्रालय में मंत्री के कार्यालय स्थित कमरे का आलम ये था कि कहीं से हवा धूप पहुंच ही नहीं पाती थी। ऊपर से कमरे के अंदर ही एक कमरा रेस्ट रुम भी बनाया हुआ था जो दशको से चला आ रहा था। चारो तरफ इतने ज्यदा फर्नीचर लगे थे कि खाली स्थान नजर नहीं आता था। ऐसे मेंज्योतिरादित्य सिंधिया ने सबसे पहले ये फैसला लिया कि अब कमरा ऐसा बंद कोठरी जैसा नजर नहीं आना चाहिए जहां न तो धूप आए और न ही हवा। सिंधियाजी को लगा कि ऐसे बंद वाले माहौल में सिर्फ दम ही घुटता है । इसलिए फैसला ये हुआ कि संचार भवन के पहले माले का पूरा का पूरा कायाकल्प जल्दी से जल्दी हो।

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