Kishtwar Encounter: सुरक्षा बलों का शनिवार (31 जनवरी) सुबह जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ के डोलगाम इलाके में छिपे आतंकवादियों से फिर सामना हुआ। सेना ने बताया कि जमीनी स्तर पर अभियान की योजना बनाने और उसे अंजाम देने के लिए सभी सोर्स से मिली खुफिया जानकारी के साथ समन्वय किया गया। व्हाइट नाइट कोर ने X पर एक पोस्ट में कहा, "संयुक्त अभियान त्राशी-1 के दौरान व्हाइट नाइट कोर, जम्मू कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के जवानों का 31 जनवरी की सुबह डोलगाम के रिहायशी इलाके में आतंकवादियों से फिर से सामना हुआ।"
उसने बताया कि इलाके की घेराबंदी कर दी गई और अभियान जारी है। पिछले दो हफ्तों में यह चौथी बार है जब इस इलाके में आतंकवादियों से सामना हुआ है। उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने किश्तवाड़ का दौरा किया। उन्होंने जिले में छिपे जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को खत्म करने के लिए जारी अभियान के तहत आतंकवाद विरोधी ग्रिड का जायजा लिया।
अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के दौरान सिंहपोरा, चिंगम और चतरू में छह किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित हैं। ताकि राष्ट्रविरोधी तत्व इनका दुरुपयोग नहीं कर सकें। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को बर्फ से ढके चतरू इलाके में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान को तेज कर दिया।
इसका ऑपरेशन का मकसद जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में छिपे जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों के ग्रुप का पता लगाकर उन्हें खत्म करना है। उन्होंने बताया कि चल रहे ऑपरेशन के दौरान देश विरोधी तत्वों द्वारा इसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सिंहपोरा, चिंगम और चतरू को कवर करने वाले छह किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहीं।
इस इलाके में ऑपरेशन 18 जनवरी को शुरू किया गया था, जिसके बाद मंडराल-सिंहपोरा के पास सोनार जंगल में भीषण गोलीबारी हुई। इसमें एक पैराट्रूपर शहीद हो गया और सात सैनिक घायल हो गए। हालांकि आतंकवादी घनी हरियाली और मुश्किल इलाके का फायदा उठाकर भागने में कामयाब रहे। लेकिन सुरक्षा बलों ने दो फीट से ज्यादा बर्फबारी के बावजूद आतंकवादियों की तलाश जारी रखी।