LPG किल्लत के बीच अब दूध के संकट की आहट! डेयरी मालिकों ने कहा- 'सिर्फ 10 दिन का बचा है पैकिंग का स्टॉक'

LPG Shortage Impact: गैस की किल्लत ने केवल पैकेजिंग ही नहीं, बल्कि दूध की मांग को भी प्रभावित किया है। होटल, रेस्टोरेंट और थोक ग्राहकों ने दूध के ऑर्डर कम कर दिए हैं। चेंबूर स्थित सुरेश डेयरी के मैनेजर शारिब शेख ने कहा है कि अगर अगले 10 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी, तो पूरा डेयरी उद्योग एक बड़े संकट में फंस सकता है

अपडेटेड Mar 16, 2026 पर 3:02 PM
डेयरी उद्योग के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती दूध के प्लास्टिक पैकेट और कार्टन की कमी है

LPG Crisis: ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण गहराया ऊर्जा संकट रसोई के बजट के बाद अब आपकी दूध की सप्लाई और सुबह की चाय पर भी भारी पड़ने वाला है। महाराष्ट्र के कई डेयरी मालिकों ने चेतावनी दी है कि LPG की किल्लत के कारण दूध की प्रोसेसिंग, पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इससे आने वाले दिनों में दूध की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

दरअसल दूध को सुरक्षित रखने के लिए उसे एक निश्चित तापमान पर गर्म यानी पाश्चुरीकरण करना जरूरी होता है, जिसमें बड़ी मात्रा में ऊर्जा की खपत होती है। गैस की अनियमित सप्लाई के कारण छोटी और मध्यम स्तर की डेयरियों के लिए दूध को खराब होने से बचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

10 दिन में खत्म हो जाएंगे पैकेट


डेयरी उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूध के प्लास्टिक पैकेट और कार्टन की कमी है। दूध के पैकेट बनाने वाली फैक्ट्रियों को पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही है, जिससे उत्पादन धीमा हो गया है। गोवर्धन डेयरी के संस्थापक देवेंद्र शाह ने बताया कि फिलहाल उनके पास पैकेजिंग मटेरियल का स्टॉक केवल 10 दिनों के लिए बचा है। अगर जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो दूध की सप्लाई करना मुश्किल हो जाएगा।

चेंबूर स्थित सुरेश डेयरी के मैनेजर शारिब शेख ने भी पुष्टि की है कि अगर अगले 10 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी, तो पूरा डेयरी उद्योग एक बड़े संकट में फंस सकता है।

होटलों से मांग घटी, कम दाम पर बिक रहा है दूध

गैस की किल्लत ने केवल पैकेजिंग ही नहीं, बल्कि दूध की मांग को भी प्रभावित किया है। होटल, रेस्टोरेंट और थोक ग्राहकों ने दूध के ऑर्डर कम कर दिए हैं क्योंकि वहां खुद LPG की कमी के कारण मेनू छोटा किया जा रहा है। बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके सिंह के अनुसार, हाल ही में भैंस के दूध के तीन बड़े ऑर्डर रद्द हुए। छोटी डेयरियों के पास दूध स्टोर करने की क्षमता नहीं है, इसलिए वे गाय और भैंस का दूध कम कीमतों पर बेचने को मजबूर हैं।

क्या अमूल और मदर डेयरी पर भी होगा असर?

राहत की बात यह है कि देश की सबसे बड़ी डेयरी सहकारी संस्थाओं पर फिलहाल इस संकट का ज्यादा असर नहीं दिख रहा है। अमूल के एमडी जयेन मेहता ने बताया कि उनकी 80% गैस की जरूरतें पूरी हो रही हैं और बाकी कमी को वे डीजल व अन्य ईंधन से पूरा कर रहे हैं। साथ ही, अमूल अपने पैकेट खुद बनाता है, इसलिए उनके पास पैकेजिंग की कमी नहीं है। मदर डेयरी भी अपने प्रोसेसिंग सेंटर्स पर PNG और अन्य वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग कर रही है, जिससे उनकी सप्लाई फिलहाल स्थिर है।

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