LTTE chief Prabhakaran: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने विजय द्वारा प्रतिबंधित संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के संस्थापक वी. प्रभाकरन को श्रद्धांजलि देने से एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी को याद दिलाया कि LTTE ही उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के लिए जिम्मेदार था। वहीं, विजय का बचाव करते हुए उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के सूत्रों ने जोर देकर कहा कि उनका संदर्भ श्रीलंका में हजारों तमिलों के नरसंहार से था, न कि केवल प्रभाकरन की मृत्यु से। प्रभाकरन को 18 मई, 2009 को श्रीलंका के मुल्लीवाइक्कल में श्रीलंकाई सेना द्वारा गोली मार दी गई थी।
Velupillai Prabhakaran श्रीलंका के तमिल उग्रवादी संगठन LTTE (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) का संस्थापक और प्रमुख था। उसका जन्म 26 नवंबर 1954 को श्रीलंका के जाफना क्षेत्र में हुआ था। वह श्रीलंका के गृहयुद्ध का सबसे चर्चित चेहरा माना जाता है। भारत ने गैरकानूनी गतिविधियां संबंधी अधिनियम के तहत लिट्टे पर 14 मई 1992 को प्रतिबंध लगा दिया था। यूरोपीय संघ, कनाडा और अमेरिका में भी इस संगठन पर प्रतिबंध था।
श्रीलंका सरकार के विरुद्ध लिट्टे के संघर्ष के दौरान शांति बहाली के लिए द्वीपीय देश गई भारतीय सेना को वहां बल प्रयोग करना पड़ा था। इसके बाद 14 मई 2024 को लिट्टे पर प्रतिबंध को भारत सरकार ने और पांच साल के लिए बढ़ा दिया। 1991 में पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या के मामले में प्रभाकरन को मुख्य आरोपी बनाया गया था।
इसी के बाद मौजूदा प्रधानमंत्री की हाई-प्रोफ़ाइल हत्या में अपनी भूमिका के चलते भारत में LTTE को प्रतिबंधित कर दिया गया था। कांग्रेस अब तमिलनाडु में विजय की अल्पमत सरकार का समर्थन कर रही है। प्रभाकरन को 18 मई, 2009 को श्रीलंका के मुल्लीवाइक्कल में श्रीलंकाई सेना द्वारा गोली मार दी गई थी।
प्रभाकरण एक तमिल परिवार से था। युवावस्था में ही उसने तमिल लोगों के अधिकारों के लिए आंदोलन शुरू कर दिया था। उस समय श्रीलंका में सिंहली और तमिल समुदायों के बीच तनाव बढ़ रहा था। तमिल समुदाय का आरोप था कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।
साल 1976 में प्रभाकरण ने LTTE नामक संगठन बनाया था। इस संगठन का उद्देश्य था श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में तमिलों के लिए अलग देश 'तमिल ईलम' बनाना। LTTE को आमतौर पर 'तमिल टाइगर्स' भी कहा जाता था।
1983 से श्रीलंका में बड़ा गृहयुद्ध शुरू हुआ। इस दौरान LTTE ने श्रीलंकाई सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध, आत्मघाती हमले और कई बड़े हमले किए। संगठन ने समुद्री और हवाई लड़ाकू यूनिट्स भी बना ली थीं, जो उस समय किसी गैर-सरकारी उग्रवादी संगठन के लिए असामान्य था।
भारत सरकार ने शुरुआती दौर में तमिल मुद्दे को लेकर कुछ समर्थन दिया था। लेकिन बाद में LTTE और भारत के संबंध खराब हो गए। 1991 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गा्ंधी की हत्या तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में आत्मघाती हमले में हुई। भारत ने LTTE को इस हत्या के लिए जिम्मेदार माना। इसके बाद भारत में LTTE पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
तमिल समुदाय के कुछ लोग उसे अपने अधिकारों के लिए लड़ने वाला नेता मानते थे। वहीं, श्रीलंका, भारत और कई अन्य देशों ने LTTE को आतंकवादी संगठन घोषित किया था। प्रभाकरण पर कई हिंसक हमलों और मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगे।
मई 2009 में श्रीलंकाई सेना ने LTTE को निर्णायक रूप से हरा दिया। उसी दौरान प्रभाकरण की मौत हो गई। श्रीलंका सरकार ने दावा किया कि वह सैन्य कार्रवाई में मारा गया। उसकी मौत के साथ ही लगभग 26 साल लंबा श्रीलंका गृहयुद्ध समाप्त हो गया।
प्रभाकरण दक्षिण एशिया के सबसे चर्चित और विवादित उग्रवादी नेताओं में गिना जाता है। उसके नेतृत्व में LTTE दुनिया के सबसे संगठित उग्रवादी संगठनों में शामिल हुआ। श्रीलंका के इतिहास, तमिल राजनीति और दक्षिण एशियाई सुरक्षा मामलों में उसका नाम आज भी महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रीलंका के अलावा तमिलनाडु की राजनीति में भी वह अक्सर चर्चा में रहता है।