Melody इतनी चॉकलेटी क्यों है? पार्ले के उस मशहूर विज्ञापन की कहानी जिसने बदल दी कैंडी मार्केटिंग की दुनिया

Melody: वीडियो में दोनों नेता हाथ में मेलॉडी टॉफी का पैकेट पकड़े नजर आ रहे हैं। मेलोनी मुस्कुराते हुए कहती हैं, "प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए एक गिफ्ट लेकर आए हैं... यह एक बहुत-बहुत अच्छी टॉफी है।" इस पर पीएम मोदी हंसते हुए कहते हैं, "मेलॉडी!" और दोनों नेता जोर से हंस पड़ते हैं

अपडेटेड May 20, 2026 पर 1:52 PM
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Melody इतनी चॉकलेटी क्यों है? पार्ले के उस मशहूर विज्ञापन की कहानी जिसने बदल दी कैंडी मार्केटिंग की दुनिया

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की दोस्ती सोशल मीडिया पर हमेशा चर्चा में रहती है। लेकिन बुधवार को इटली दौरे के दौरान दोनों नेताओं के बीच एक ऐसा मीठा और मजेदार पल देखने को मिला, जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है। पीएम मोदी ने अपनी इस यात्रा के दौरान इटली की पीएम मेलोनी को भारत की सबसे मशहूर टॉफियों में से एक'पार्ले मेलॉडी' (Parle Melody) का एक पैकेट गिफ्ट किया। इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने इस खास पल का एक वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया और लिखा- "गिफ्ट के लिए शुक्रिया।"

वीडियो में दोनों नेता हाथ में मेलॉडी टॉफी का पैकेट पकड़े नजर आ रहे हैं। मेलोनी मुस्कुराते हुए कहती हैं, "प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए एक गिफ्ट लेकर आए हैं... यह एक बहुत-बहुत अच्छी टॉफी है।" इस पर पीएम मोदी हंसते हुए कहते हैं, "मेलॉडी!" और दोनों नेता जोर से हंस पड़ते हैं।

आखिर क्या है 'मेलॉडी' का इतिहास? जिसने इटली की पीएम का दिल जीता


जो लोग भारत में पले-बढ़े हैं, उनके लिए मेलॉडी सिर्फ एक टॉफी नहीं, बल्कि बचपन की याद है। आइए जानते हैं कि भारत की इस सबसे पसंदीदा टॉफी की शुरुआत कब और कैसे हुई:

साल 1983 में हुई थी शुरुआत

मेलॉडी टॉफी को बनाने वाली कंपनी का नाम पार्ले प्रोडक्ट्स (Parle Products) है। पार्ले कंपनी की शुरुआत साल 1929 में मुंबई के 'विले पार्ले' इलाके में चौहान परिवार ने की थी। पहले यह कंपनी केवल छोटी-मोटी कैंडीज बनाती थी, जिसके बाद इसने Parle-G जैसे मशहूर बिस्कुट बनाने शुरू किए। साल 1983 में कंपनी ने बाजार में एक नई टॉफी उतारी, जिसे नाम दिया गया- Melodi।

क्यों खास है मेलॉडी टॉफी?

1980 के दशक में भारत में मिलने वाली ज्यादातर टॉफियां या तो पूरी तरह सख्त (hard candies) होती थीं या फिर एक जैसी होती थीं। लेकिन मेलॉडी ने बाजार में एक नया एक्सपेरिमेंट किया:

इसके बाहर की परत कड़क और कैरेमल (मलाईदार टॉफी) स्वाद वाली होती है। जैसे ही आप इसे चबाते हैं, इसके अंदर से गाढ़ी चॉकलेट क्रीम निकलती है।

यही वजह है कि इसके एक ही टॉफी में दो अलग-अलग स्वाद और मजा मिलता है।

वो मशहूर कैंपेन: "मेलॉडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?"

असल में Parle कंपनी चाहती थी कि लोग समझें कि Melody दूसरी टॉफियों से ज्यादा चॉकलेटी है। लेकिन मुश्किल ये थी कि बिना किसी दूसरी ब्रांड का नाम लिए ये बात लोगों तक पहुंचानी थी। ये काम एड एजेंसी Everest को मिला।

एजेंसी में काम कर रहे हरेश मूरजानी ने एक मजेदार आइडिया सोचा। उन्होंने तय किया कि ऐड में ऐसे लोगों को दिखाया जाए जिन्हें बच्चे पसंद करते हैं या जैसा बनना चाहते हैं- जैसे जादूगर, टीचर, स्पोर्ट्स कोच या फिल्म स्टार। ये लोग बच्चों से एक सवाल पूछेंगे और बच्चे उसका जवाब देंगे।

कॉपीराइटर सुलेखा बाजपेयी ने इस आइडिया पर कुछ लाइनें लिखीं। Parle के ऑफिस में प्रेजेंटेशन से पहले वो लगातार उन लाइनों को बेहतर करती रहीं। तभी उनके दिमाग में वो लाइन आई जो बाद में बहुत फेमस हुई-

“Melody ke andar itni chocolate kaise bhari, batao?” और उसका जवाब था - “Melody khao, khud jaan jao”

यही लाइन Melody की पहचान बन गई। इसके साथ एक जिंगल भी था- “Melody hai chocolatey, Melody hai chocolatey” इससे लोगों के दिमाग में ये बात बैठ गई कि Melody बहुत चॉकलेटी टॉफी है।

Melody के टीवी ऐड कैसे बने?

Melody को गांव और शहर दोनों जगह बेचना था, इसलिए टीवी पर ऐड दिखाने का फैसला किया गया। ये ऐड फिल्ममेकर संजीव शर्मा ने बनाए।

ऐड खासतौर पर बच्चों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। हर ऐड में रोजमर्रा की जगहें दिखाई जाती थीं, जैसे स्कूल, खेल का मैदान या जादू का शो।

किसी ऐड में स्पोर्ट्स कोच पूछता था  “Melody itni chocolatey kaise hai?”

तो बच्चा खुशी से जवाब देता- “Melody khao, khud jaan jao.”

किसी ऐड में टीचर यही सवाल पूछती थीं। एक दूसरे ऐड में फिल्म स्टार से भीड़ में से कोई यही सवाल पूछता था और वो मुस्कुराकर वही जवाब देती थीं।

इन ऐड्स का मकसद लोगों में उत्सुकता पैदा करना था कि आखिर Melody में इतना चॉकलेटी स्वाद कैसे है। जवाब सीधा नहीं दिया जाता था, बल्कि लोगों को खुद ट्राय करने के लिए कहा जाता था।

आखिर में वही जिंगल बजता था - “Melody hai chocolatey…” और यही लाइन लोगों के दिल और दिमाग में बस गई।

इस मजेदार और सीधे संवाद ने लोगों के मन में ऐसा जादू किया कि यह लाइन भारत का एक मशहूर मुहावरा बन गई। लोग सिर्फ यह जानने के लिए दुकान पर जाकर मेलॉडी खरीदने लगे कि आखिर यह इतनी चॉकलेटी क्यों है!

आज लॉन्च होने के 40 से भी ज्यादा सालों बाद भी मेलॉडी अपने उसी असली स्वाद, सुनहरे और पारदर्शी (गोल्डन-ट्रांसपेरेंट) रैपर और इसी अलग पहचान के साथ भारत की नंबर-1 चॉकलेट कैंडीज में बनी हुई है। और अब, इसका स्वाद इटली तक भी पहुंच गया है!

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