Middle East Crisis: क्रूड ऑयल की कीमतों में आग लग गई है। यह अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई का असर है। 28 फरवरी को यह लड़ाई शुरू हुई थी। 27 फरवरी को ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर प्रति बैरल था। अब यह 85 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है। मध्यपूर्व की लड़ाई का सीधा असर क्रूड और गैस की कीमतों पर पड़ा है।
क्रूड का भाव 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है
कतर ने 6 फरवरी को कहा कि अगर यह लड़ाई जल्द नहीं रुकी तो क्रूड का भाव 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। यह भारत जैसे देश के लिए खराब खबर है, जो अपनी 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड की जरूरत इंपोर्ट से पूरा करता है। सवाल है कि अभी भारत में क्रूड का कितना स्टॉक है और यह कितने दिनों तक इस्तेमाल के लिए पर्याप्त है?
10 करोड़ बैरल कमर्शियल क्रूड का स्टॉक
Kpler के मुताबिक, इंडिया के पास अभी करीब 10 करोड़ बैरल कमर्शियल क्रूड ऑयल का स्टॉक है। यह स्टोरेज टैंक्स, अंडरग्राउंड स्ट्रेटेजिक रिजर्व और उन जहाजों पर जो भारत पहुंचने वाले हैं। अगर होर्मुज की खाड़ी से क्रूड ऑयल की सप्लाई बंद हो जाती है तो भारत में क्रूड का यह भंडार करीब 40-45 दिनों तक इस्तेमाल के लिए पर्याप्त है। यह राहत की बात है। फिलहाल अमेरिका-ईरान लड़ाई रुकने का कोई संकेत नहीं दिख रहा। दोनों में से कोई पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है।
इंडिया 88 फीसदी क्रूड इंपोर्ट करता है
इंडिया क्रू़ड की अपनी कुल जरूरत का करीब 88 फीसदी इंपोर्ट करता है। क्रूड भारत में पहुंचने पर उसकी रिफाइनिंग होती है, जिससे पेट्रोल और डीजल जैसे फ्यूल मार्केट में पहुंचते हैं। भारत करीब 50 फीसदी क्रूड ऑयल मध्यपूर्व के देशों से खरीदता है। यह क्रूड होर्मुज की खाड़ी के रास्ते भारत आता है। चिंता की बात यह है कि मध्यपूर्व की लड़ाई का असर इस चैनल पर पड़ा है। बताया जा रहा है कि यह रास्ता बंद है।
सप्लाई बंद होने से भारत को खरीदना पड़ेगा महंगा क्रूड
Kpler के एनालिस्ट सुमित रितोलिया ने कहा कि अगर कुछ समय के लिए मध्यपूर्व से क्रूड की सप्लाई पूरी तरह से बंद हो जाती है तो इसका सीधा असर क्रूड की कीमतों पर पड़ेगा। अगर होर्मुज की खाड़ी लंबे समय तक बंद रहती है तो फिर क्रूड की सप्लाई को लेकर रिस्क बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा, "हालांकि, रिफाइनिंग कंपनियां कमर्शियल इनवेंट्री रखती हैं। इसके अलावा जो जहाज अभी रास्ते में हैं, वे भारत पहुंचने वाले हैं। इससे कुछ समय के लिए राहत मिलेगी। लेकिन, सप्लाई लंबे समय तक बंद होने पर भारत के लिए फ्रेट कॉस्ट बढ़ जाएगी।"
FY25 में भारत ने क्रूड आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए
भारत रोजाना 50 लाख बैरल क्रूड आयात के जरिए आता है। इसमें से करीब 25 लाख बैरल होर्मुज के रास्ते आता है। अगर यह सप्लाई लंबे समय तक बंद हो जाती है तो भारत के लिए क्रूड की कॉस्ट काफी बढ़ जाएगी। भारत पहले से ही क्रूड के इंपोर्ट पर काफी डॉलर खर्च करता है। 31 मार्च, 2025 को खत्म हुए वित्त वर्ष में भारत ने क्रूड के आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए थे। इस वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों में भारत क्रूड के आयात पर 100.4 अरब डॉलर खर्च किए हैं। इस दौरान 20.6 करोड़ टन क्रूड भारत आया है।