अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुए एक हफ्ता बीत चुका है। 28 फरवरी दिन शनिवार को यह लड़ाई शुरू हुई थी। इस बीच, दोनों में से कोई पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। शेयर बाजारों पर दबाव दिख रहा है। माना जा रहा है कि अगर लड़ाई जल्द खत्म नहीं होती है तो इसका भारत जैसे देशों पर काफी खराब असर पड़ेगा, जो एनर्जी की अपनी जरूरत के लिए इंपोर्ट पर निर्भर हैं। सवाल है कि अगर यह लड़ाई जल्द खत्म नहीं हुई तो क्या होगा?
मध्यपूर्व लड़ाई की कमजोर कड़ी है होर्मुज की खाड़ी
इस लड़ाई की सबसे नाजुक कड़ी खासकर भारत और चीन के लिए होर्मुज की खाड़ी है। दुनिया में करीब 20 फीसदी ऑयल और गैस की सप्लाई होर्मुज के रास्ते होती है। खासकर भारत और चीन के लिए यह काफी ज्यादा अहम है। होर्मुज की खाड़ी को लेकर कई तरह की खबरें आ रही हैं। कुछ सूत्रों का कहना है कि ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया है। इस रास्ते का पूरी तरह बंद होना भारत और चीन के लिए चिंता की बात है। हालांकि, दोनों देश ऑयल और गैस की सप्लाई के विकल्प की तलाश कर रहे हैं।
लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी
मध्यपूर्व की लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतों को आग लगी है। क्रूड करीब 19 फीसदी तक महंगा हो चुका है। यह 85-90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इससे दुनियाभर में डर बढ़ा है। आज ऑयल और गैस उपलब्ध नहीं होने पर सामान्य कामकाज ठप पड़ सकता है। इसका असर आबादी के बड़े हिस्से पर पड़ेगा। सूरत को मोरबी में टाइल्स फैक्ट्रियों के उत्पादन बंद करने की खबर आ रही है। आने वाले दिनों में दूसरी इंडस्ट्रीज से ऐसी खबरें सुनने को मिल सकती है।
ऑयल और गैस की बढ़ती कीमतें बन सकती हैं बड़ी मुसीबत
ट्रांसपोर्ट के साधन, इंडस्ट्री में उत्पादन और समुद्री जहाजों की आवाजाही ठप पड़ने का असर आम आदमी की जेब से लेकर सरकारों के खजानों तक पर पड़ेगा। खासकर भारत में इसका ज्यादा असर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि भारत ईंधन की अपनी 80 फीसदी से ज्यादा जरूरत इंपोर्ट से पूरी करता है। सरकार पेट्रोल-डीजल ऐसे ईंधन पर काफी टैक्स वसूलती है, जिससे उसके खजाने में काफी पैसा आता है। सरकार इस पैसे का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर, सोशल स्कीम आदि के लिए करती है।
शेयर बाजारों को लड़ाई लंबी नहीं चलने की उम्मीद
मध्यपूर्व की लड़ाई का सबसे कम असर आस्टेलियाई मार्केट पर पड़ने का अनुमान था। लेकिन आस्ट्रेलिया के शेयर बाजार में भी इस हफ्ते 3.8 फीसदी की गिरावट आई है। दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक Kospi एक हफ्ते में करीब 10 फीसदी क्रैश कर चुका है। यह सूचकांक एक दिन में 13 फीसदी टूट गया था। बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई। चीन का शंघाई कंपोजिट एक हफ्ते में अपेक्षाकृत कम सिर्फ 0.66 फीसदी गिरा है। जापान का निक्केई इस दौरान 4 फीसदी गिरा है। निफ्टी इस दौरान करीब 3 फीसदी टूटा है। अमेरिका का एसएंडपी500 1.24 फीसदी गिरा है।
यह लड़ाई दूसरी लड़ाइयों से कई मायनों में है अलग
अब तक शेयर बाजारों में एक हफ्ते में आई गिरावट से संकेत मिलता है कि बाजार को यह लड़ाई जल्द खत्म होने की उम्मीद है। लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और संकेत दे रही है। कई एनालिस्ट्स का कहना है कि यह लड़ाई रूस-यूक्रेन और हमास-इजरायल की लड़ाई से काफी अलग है। इन दोनों लड़ाइयों का ग्लोबल इकोनॉमी पर सीमित असर था।
क्रूड और गैस की ऊंची कीमतों से कई देशों में बढ़ेगी दिक्कत
अमेरिका और ईरान की लड़ाई का ग्लोबल इकोनॉमी पर व्यापक असर पड़ता दिख रहा है। सबसे ज्यादा असर क्रूड सहित कमोडिटीज की ऊंची कीमतों का पड़ेगा। अगर दोनों की कीमतें बेकाबू हुईं तो कई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट पैदा हो सकता है। कतर के एक सीनियर मिनिस्टर ने 6 मार्च को कहा था कि क्रूड 150 डॉलर तक जा सकता है।