2025 में अमेरिका से 3,800 से ज्यादा भारतीयों को किया डिपोर्ट, केंद्र सरकार ने संसद को बताया

विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि भारत सरकार अमेरिका और अन्य देशों की सरकारों के साथ डिपोर्टेशन से जुड़े मामलों में लगातार संपर्क में रहती है। उन्होंने कहा कि डिपोर्टेशन तभी किया जाता है, जब संबंधित व्यक्ति की भारतीय नागरिकता की पूरी तरह पुष्टि हो जाती है

अपडेटेड Feb 05, 2026 पर 9:09 PM
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2025 में अमेरिका से 3,800 से ज्यादा भारतीयों को किया डिपोर्ट, केंद्र सरकार ने संसद को बताया

सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि 2025 में अमेरिका से 3,800 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित जवाब में बताया कि मध्य दिसंबर 2025 तक 3,414 भारतीयों को वॉशिंगटन के जरिए डिपोर्ट किया गया। यह जानकारी एक टेबल फॉर्मेट में दी गई।

कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सरकार से सवाल किया था कि पिछले पांच सालों में अमेरिका और दूसरे देशों से कितने भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि कमजोर युवाओं को बचाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, जैसे ट्रैवल एजेंसियों का रजिस्ट्रेशन, लाइसेंसिंग, सीमा समन्वय और अवैध “डंकी रूट” से हो रहे पलायन को रोकने के लिए कोई लक्ष्य या समय-सीमा तय की गई है या नहीं।

“डंकी रूट” या “डोंकी रूट” उस अवैध रास्ते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल खासतौर पर उत्तरी अमेरिका में गैरकानूनी तरीके से जाने के लिए किया जाता है।


लिखित जवाब में दी गई जानकारी के अनुसार, 2025 में अमेरिका में स्थित भारतीय दूतावासों से जुड़े डिपोर्टेशन के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • न्यूयॉर्क- 47
  • अटलांटा- 31
  • ह्यूस्टन- 234
  • सैन फ्रांसिस्को- 49
  • सिएटल- 31

विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि भारत सरकार अमेरिका और अन्य देशों की सरकारों के साथ डिपोर्टेशन से जुड़े मामलों में लगातार संपर्क में रहती है।

उन्होंने कहा कि डिपोर्टेशन तभी किया जाता है, जब संबंधित व्यक्ति की भारतीय नागरिकता की पूरी तरह पुष्टि हो जाती है।

सरकार ने यह भी बताया कि अमेरिका से बातचीत के दौरान भारतीय नागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार पर खास जोर दिया गया है।

मंत्री ने कहा, “हमने अमेरिकी अधिकारियों के सामने अपनी चिंता दर्ज कराई है, खासकर डिपोर्ट किए जा रहे लोगों- खासतौर से महिलाओं और बच्चों- पर हथकड़ी या अन्य बंधनों के इस्तेमाल को लेकर।”

डिपोर्ट होकर लौटे लोगों की जानकारी और बयानों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारों ने कई मामलों में केस दर्ज किए हैं। अवैध भर्ती एजेंटों, अपराधियों और मानव तस्करी से जुड़े गिरोहों के खिलाफ जांच और कार्रवाई जारी है।

सरकार ने कहा कि विदेश में नौकरी के लिए जाने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

प्रवासन अधिनियम, 1983 के तहत कोई भी व्यक्ति या एजेंसी बिना वैध लाइसेंस के भर्ती एजेंट के रूप में काम नहीं कर सकती। यह लाइसेंस प्रोटेक्टर जनरल ऑफ एमिग्रेंट्स द्वारा जारी किया जाता है।

फर्जीवाड़े और शोषण को रोकने के लिए भर्ती एजेंटों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।

इसके अलावा, ECR पासपोर्ट धारकों को 19 अधिसूचित देशों में काम के लिए जाने से पहले इमिग्रेशन क्लियरेंस लेना जरूरी है।

मंत्रालय ने बताया कि वह eMigrate पोर्टल, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से फर्जी नौकरी गिरोहों के खतरे को लेकर लगातार चेतावनी जारी करता रहता है।

दिसंबर 2025 तक देश में 3,505 बिना रजिस्ट्रेशन वाले एजेंटों को eMigrate पोर्टल पर चिन्हित किया जा चुका है।

सरकार का कहना है कि अवैध पलायन रोकने और युवाओं को सुरक्षित रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

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