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मुकेश अंबानी ने ICT को दी 151 करोड़ रुपए की गुरु दक्षिणा, इसी इंस्टीट्यूट से हैं स्नातक, प्रोफेसर शर्मा को कहा - राष्ट्र गुरु

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने आज मुंबई के इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (ICT) को 151 करोड़ रुपए बिना शर्त देने की घोषणा की। यहां से उन्होंने 1970 के दशक में स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। अंबानी ने आज आईसीटी में तीन घंटे से अधिक समय बिताया। मुकेश अंबानी प्रोफेसर एमएम शर्मा की जीवनी 'डिवाइन साइंटिस्ट' के प्रकाशन के लिए आयोजित समारोह में आये थे

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 07, 2025 पर 11:08 AM
मुकेश अंबानी ने ICT को दी 151 करोड़ रुपए की गुरु दक्षिणा, इसी इंस्टीट्यूट से हैं स्नातक, प्रोफेसर शर्मा को कहा - राष्ट्र गुरु
मुकेश अंबानी ने इंडियन केमिकल इंडस्ट्री के उत्थान का श्रेय प्रोफेसर एमएम शर्मा के प्रयासों को देते हुए अपने भाषण में उन्हें 'राष्ट्र गुरु - भारत का गुरु' कहा

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani, Chairman and Managing Director, Reliance Industries) ने आज मुंबई के इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (Institute of Chemical Technology (ICT) को 151 करोड़ रुपए बिना शर्त देने की घोषणा की। यहां से उन्होंने 1970 के दशक में स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। अंबानी ने आज आईसीटी में तीन घंटे से अधिक समय बिताया। आईसीटी को उस समय यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (University Department of Chemical Technology (UDCT) कहा जाता था। मुकेश अंबानी प्रोफेसर एमएम शर्मा की जीवनी 'डिवाइन साइंटिस्ट' के प्रकाशन के लिए आयोजित समारोह में यहां आये थे।

प्रोफेसर शर्मा को बताया आर्थिक सुधारों के शांत वास्तुकार

मुकेश अंबानी ने इस समारोह में याद दिलाया कि कैसे प्रोफेसर शर्मा द्वारा UDCT में दिए गए पहले व्याख्यान ने उन्हें प्रेरित किया और कैसे प्रोफेसर शर्मा ने बाद में भारत के आर्थिक सुधारों के शांत वास्तुकार (quiet architect of India’s economic reforms) की भूमिका निभाई। प्रोफेसर शर्मा ने नीति निर्माताओं को प्रभावित किया कि भारत के विकास का एकमात्र तरीका भारतीय उद्योग को लाइसेंस-परमिट-राज से मुक्त करना है। इससे भारतीय कंपनियां नये आयाम बना सकेंगी, आयात पर निर्भरता कम कर सकेंगी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी।

अंबानी ने आगे कहा, "मेरे पिता धीरूभाई अंबानी (Dhirubhai Ambani) की तरह, उनमें भी भारतीय उद्योग को अभाव से ग्लोबल लीडरशिप में बदलने की तीव्र इच्छा थी।" उन्होंने आगे कहा, "इन दो साहसी दूरदर्शी लोगों का मानना ​​था कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी, निजी उद्यमिता (private entrepreneurship) के साथ मिल कर समृद्धि के द्वार खोलेंगी।"

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