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One District One Cuisine: लखीमपुर खीरी के 'कच्चे केले के कोफ्ते' और वो स्वाद जिसमें बसी है तराई की खुशबू, जानिए इस लजीज स्वाद की खासियत

One District One Cuisine: लखीमपुर खीरी सिर्फ अपनी तराई और बाघों के लिए नहीं, बल्कि थाली में परोसे जाने वाले प्रेम और शुद्धता के लिए भी मशहूर है। यहां गन्ने और केले की भरपूर पैदावार से बने व्यंजन हर शुभ अवसर और रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा हैं।

Shradha Tulsyanअपडेटेड May 15, 2026 पर 7:00 AM
One District One Cuisine: लखीमपुर खीरी के 'कच्चे केले के कोफ्ते' और वो स्वाद जिसमें बसी है तराई की खुशबू, जानिए इस लजीज स्वाद की खासियत

उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला लखीमपुर खीरी केवल अपनी घनी तराई और बाघों की दहाड़ के लिए ही नहीं पहचाना जाता, बल्कि यहां की थाली में परोसा जाने वाला प्रेम और शुद्धता भी इसे खास बनाती है। जहां बुंदेलखंड में दाल-बाफला का बोलबाला है, वहीं नेपाल की सरहदों से सटे खीरी के इलाकों में खेती की प्रधानता यहां के खान-पान में साफ झलकती है। यहां गन्ने के साथ-साथ केले की पैदावार प्रचुर मात्रा में होती है, यही कारण है कि 'कच्चे केले' से बने व्यंजन यहां के हर शुभ अवसर और दैनिक भोजन का अभिन्न हिस्सा हैं।

केले के कोफ्ते

यहां की रसोई में कच्चे केले का उपयोग केवल सब्जी के रूप में नहीं, बल्कि एक 'शाही डिश' के तौर पर किया जाता है। लखीमपुर के स्थानीय घरों में बनने वाले 'कच्चे केले के कोफ्ते' अपनी बनावट में इतने रेशमी होते हैं कि मुंह में जाते ही घुल जाते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसमें मसालों का उपयोग बहुत ही संतुलित तरीके से किया जाता है, ताकि केले का प्राकृतिक कसैलापन दूर हो जाए और मसालों की खुशबू हावी न हो।

कैसे तैयार होता है यह जादुई स्वाद?

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