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Shani Jayanti 2026: शनि जयंति पर सही तरीके से अर्पित करें शनिदेव को तेल, लाभ की जगह कंगाल बना सकती है छोटी सी गलती

Shani Jayanti 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनि देव का जन्म हुआ था। इस वर्ष शनि जयंती का शनिवार को पड़ना एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग माना जा रहा है। आइए जानें इस दिन शनि देव को तेल अर्पित करने का सही तरीका क्या है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 15, 2026 पर 7:00 AM
Shani Jayanti 2026: शनि जयंति पर सही तरीके से अर्पित करें शनिदेव को तेल, लाभ की जगह कंगाल बना सकती है छोटी सी गलती
इस साल ज्येष्ठ अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है।

Shani Jayanti 2026: शनि जयंति का हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान सूर्य और छाया के पुत्र शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या को हुआ था। इसलिए ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंति के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन देश के कुछ हिस्सों में विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए वट सावित्री का व्रत भी करती हैं। इसलिए यह दिन अपने आप में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल यह पर्व शनिवार, 16 मई, 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन एक और दुर्लभ संयोग पड़ रहा है। इस साल ज्येष्ठ अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है। इस दिन को शनैश्चरी अमावस्या के रूप में भी मनाया जाएगा।

शनि जयंति तारीख

अमावस्या तिथि प्रारंभ : 16 मई, 2026 को सुबह 05:11 बजे।

अमावस्या तिथि समाप्त : 17 मई, 2026 को सुबह 01:30 बजे।

पूजा का विशेष मुहूर्त : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव की पूजा शाम के समय करना अधिक फलदायी होता है। 16 मई को शाम 07:05 बजे से रात 08:23 बजे तक का समय विशेष शुभ माना जा रहा है।

तेल चढ़ाते समय न करें ये गलतियां

शनि जयंती के दिन भक्त बड़ी संख्या में शनि देव पर सरसों का तेल चढ़ाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत तरीके से चढ़ाया गया तेल फायदे की जगह आपके जीवन में संकट ला सकता है? ऐसे में आइए जानते हैं तेल चढ़ाते समय किन सावधानियों का पालन करना जरूरी है?

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