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फिर जीवंत होगा मुकुंदरा-रामगढ़ विषधारी ऐतिहासिक टाइगर कॉरीडोर

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रणथंभौर से मुकुंदरा टाइगर रिज़र्व में बाघ T-2408 के सफल स्थानांतरण पर कोटा सहित पूरे हाड़ौती क्षेत्र के नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हाड़ौती में जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है

Amitabh Sinhaअपडेटेड Jan 09, 2026 पर 9:33 PM
फिर जीवंत होगा मुकुंदरा-रामगढ़ विषधारी ऐतिहासिक टाइगर कॉरीडोर
फिर जीवंत होगा मुकुंदरा-रामगढ़ विषधारी ऐतिहासिक टाइगर कॉरीडोर

करीब एक सदी पहले खत्म हुआ हाड़ौती का ऐतिहासिक टाइगर कॉरिडोर एक बार फिर जीवंत होगा। रामगढ़ विषधारी से लेकर मुकुंदरा की अप स्ट्रीम बाघों के संरक्षण का प्रमुख केंद्र बनेगी। बाघों की प्रजाति को सशक्त बनाने की दिशा में भी रामगढ़-मुकुंदरा ऐतिहासिक भूमिका निभाएंगे। रामगढ़ में पेंच टाइगर रिजर्व और अब रणथंभौर से मुकुंदरा में बाघ लाकर इस दिशा में वन विभाग ने एतिहासिक कदम उठाया है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रणथंभौर से मुकुंदरा टाइगर रिज़र्व में बाघ T-2408 के सफल स्थानांतरण पर कोटा सहित पूरे हाड़ौती क्षेत्र के नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हाड़ौती में जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बिरला ने कहा कि मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व में हो रहे समन्वित प्रयास आने वाले समय में कोटा–बून्दी क्षेत्र को बाघ संरक्षण का प्रमुख केंद्र बनाएंगे। कोटा बूंदी में बाघों की संख्या बढ़ने से न सिर्फ इको-टूरिज़्म को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार व आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे। वन संरक्षण, पर्यटन और जनभागीदारी का यह साझा प्रयास हाड़ौती को प्रकृति और विकास के संतुलन का उदाहरण बनाएगा।

2 से 6 हुई बाघ-बाघिन की संख्या

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