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Muslim Reservation: महाराष्ट्र में मुस्लिमों को अब नहीं मिलेगा 5% आरक्षण, फडणवीस सरकार ने रद्द किया कोटा

Muslim Reservation: महाराष्ट्र सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समुदायों को 5% आरक्षण देने के अपने पहले के फैसले को रद्द कर दिया है। इसका मतलब यह भी है कि कॉलेजों और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में अब मुस्लिमों को 5% रिजर्वेशन के तहत एडमिशन नहीं दिए जाएंगे

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Feb 18, 2026 पर 8:06 AM
Muslim Reservation: महाराष्ट्र में मुस्लिमों को अब नहीं मिलेगा 5% आरक्षण, फडणवीस सरकार ने रद्द किया कोटा
Muslim Reservation: महाराष्ट्र में अब मुस्लिम समुदाय को 5 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा

Muslim Reservation: महाराष्ट्र सरकार ने मुस्लिम समुदाय को 5 फीसदी आरक्षण देने के अपने पहले के फैसले को पलट दिया है। आरक्षण का लाभ देने के लिए मुस्लिमों को स्पेशल बैकवर्ड क्लास-A (SBC-A) कैटेगरी में रखा गया था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने इस संबंध में नया सरकारी आदेश (GR) जारी कर निर्णय को औपचारिक रूप दे दिया है। यह रिजर्वेशन 2014 में एक ऑर्डिनेंस के जरिए शुरू किया गया था, जो सरकारी नौकरियों और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के लिए था।

इस ऑर्डिनेंस को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसने उसी साल 14 नवंबर को इस पर रोक लगा दी थी। महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार (18 फरवरी) देर रात सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समुदायों को 5% आरक्षण देने के अपने पहले के फैसले को रद्द कर दिया। खास बात यह है कि 23 दिसंबर, 2014 तक ऑर्डिनेंस कानून नहीं बना था। इस आदेश के साथ ही सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) कैटेगरी के तहत मुस्लिम समुदाय को मिलने वाले लाभ अब लागू नहीं होंगे।

इसलिए यह अपने आप खत्म हो गया। इस वजह से सरकार ने अब इस प्रोविजन के तहत जारी किए गए जाति सर्टिफिकेट और वैलिडिटी सर्टिफिकेट सहित सभी संबंधित फैसलों और सर्कुलर को अमान्य घोषित कर दिया है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद महाराष्ट्र सरकार ने यू-टर्न लेते हुए 2014 में सामाजिक और एजुकेशनल रूप से पिछड़े मुस्लिम समुदाय को दिया गया रिजर्वेशन रद्द कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, जुलाई 2014 में एक ऑर्डिनेंस के जरिए लाया गया रिजर्वेशन, सरकारी नौकरियों और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में मुसलमानों को फायदे देने के लिए था। लेकिन, इस ऑर्डिनेंस को मुंबई हाई कोर्ट में चैलेंज किया गया। कोर्ट ने सिर्फ चार महीने में स्टे ऑर्डर जारी कर दिया गया। क्योंकि ऑर्डिनेंस 23 दिसंबर 2014 तक कानून नहीं बना। इसलिए यह अपने आप लैप्स हो गया, जिससे यह इनइफेक्टिव हो गया।

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