Naxals killed in Jharkhand: झारखंड में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता, मुठभेड़ में 1 करोड़ के इनामी अनल दा सहित 15 नक्सली ढेर

Naxals killed in Jharkhand: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नक्सल प्रभावित सारंडा जंगल क्षेत्र में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। गुरुवार (22 जनवरी) को हुई मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी माओवादी पतिराम मांझी उर्फ अनल दा समेत 15 नक्सलियों को मार गिराया गया

अपडेटेड Jan 22, 2026 पर 6:48 PM
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Naxals killed in Jharkhand: झारखंड में में हुए पुलिस मुठभेड़ में कुख्यात नक्सली अनल दा मारा गया

Naxals killed in Jharkhand: झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में गुरुवार (22 जनवरी) को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में शीर्ष माओवादी नेता अनल दा समेत 15 नक्सली मारे गए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अनल दा पर एक करोड़ रुपये का इनाम था। पुलिस ने बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की कोबरा इकाई के लगभग 1,500 जवान सारंडा जंगल के कुमडी में किरीबुरु थाना क्षेत्र में अभियान में शामिल हैं। अनल दा को झारखंड के सबसे खूंखार माओवादी नेताओं में से एक माना जाता था।

15 माओवादियों के शव बरामद

एक पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया, "हमने माओवादियों के शीर्ष नेता पतिराम माझी उर्फ ​​अनल दा समेत 15 माओवादियों के शव बरामद किए हैं। भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए हैं। सुबह छह बजे शुरू हुई मुठभेड़ अभी जारी है।" उन्होंने बताया कि सारंडा के जंगल में मंगलवार से ही माओवादी विरोधी अभियान चल रहा है। लेकिन गोलीबारी गुरुवार सुबह शुरू हुई।


चाईबासा के घने जंगलों से एनकाउंटर

यह मुठभेड़ चाईबासा के घने जंगल इलाके में हुई, जब सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी के आधार पर तलाशी अभियान शुरू किया। ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी फायरिंग की। इस एनकाउंटर में 15 नक्सली मारे गए।

कौन था अनल दा?

पुलिस महानिरीक्षक (ऑपरेशन) माइकल राज एस ने पीटीआई को बताया कि पुलिस को सारंडा जंगल में अनल दा और अन्य माओवादियों की मौजूदगी के बारे में सूचना मिलने के बाद अभियान शुरू किया गया। गिरिडीह जिले का पिरतांड निवासी अनल दा 1987 से सक्रिय था। पुलिस वर्षों से उसकी तलाश कर रही है।

सीआरपीएफ के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने सोमवार को पश्चिम सिंहभूम जिले के मुख्यालय चाईबासा का दौरा किया था। झारखंड में कोल्हान और सारंडा को माओवादियों का अंतिम गढ़ माना जाता है। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने बूढ़ा पहाड़, चतरा, लातेहार, गुमला, लोहरदगा, रांची और पारसनाथ में उनकी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से सीमित कर दिया है।

हथियार और गोला-बारूद बरामद

अधिकारियों ने बताया कि कई घंटों तक चली मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों को निर्णायक बढ़त मिली। मुठभेड़ स्थल से कई नक्सलियों के शव, अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद और अन्य सामग्री बरामद की गई है। कोल्हान प्रमंडल के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने बताया कि अभियान अभी जारी है। इसके पूरी तरह समाप्त होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

अभी भी तलाशी अभियान जारी

सुरक्षा को देखते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है। साथ ही अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है। वरिष्ठ पुलिस और सुरक्षा अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं। हाल ही में सीआरपीएफ के डीजी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने चाईबासा में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी, जिसमें नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की रणनीति पर चर्चा हुई थी। इस बैठक के बाद झारखंड और ओडिशा से बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती सारंडा क्षेत्र में की गई थी।

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सारंडा जंगल लंबे समय से नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। हाल के महीनों में चाईबासा, कोल्हान और पोड़ाहाट क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी आई है। जून 2025 में टोंटो और गोइलकेरा इलाके में हुई मुठभेड़ में चार नक्सली मारे गए थे। वर्ष 2026 में यह नक्सलियों के साथ पहली बड़ी मुठभेड़ मानी जा रही है, जिसे सुरक्षाबलों की एक अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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