Rahul Gandhi: 'नेहरू ने हजारों एकड़ जमीन सरेंडर कर दी...'; चीन को लेकर BJP ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

Parliament Budget Session 2026: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार (2 फरवरी) को सदन में पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम एम नरवणे की अप्रकाशित किताब के कुछ अंश का हवाला देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर निशाना साधने का प्रयास किया। इस पर सत्तापक्ष ने भारी विरोध जताया, जिसके कारण जमकर हंगामा हुआ

अपडेटेड Feb 02, 2026 पर 4:51 PM
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Parliament Budget Session 2026: चीन के मामले को लेकर बीजेपी राहुल गांधी पर हमलावर हो गई है

Parliament Budget Session 2026: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चीन के मामले में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर हमला तेज कर दिया है। भगवा पार्टी ने सोमवार (2 फरवरी) को कांग्रेस सांसद पर लोकसभा में चीन के बारे में मनगढ़ंत बातें पढ़ने का आरोप लगाया। साथ ही चेतावनी दी कि ऐसा व्यवहार एक खतरनाक मिसाल कायम करता है। BJP नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी बिना वेरिफाई किए गए दावों का हवाला देकर संसद की गरिमा को कम कर रहे हैं। उन्हें इसके बजाय स्थापित ऐतिहासिक बातों पर भरोसा करना चाहिए।

भारत-चीन इतिहास पर राहुल गांधी की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने संसद में कहा, "राहुल गांधी चीन के बारे में मनगढ़ंत बातें पढ़ रहे हैं। लेकिन नेहरू ने चीन में क्या किया। इसके बारे में पब्लिक डोमेन में बहुत कुछ है। उन्होंने सिर्फ अपनी स्टेट्समैनशिप को आगे बढ़ाने के लिए हजारों एकड़ जमीन सरेंडर (चीन को) कर दी थी।"

निशिकांत दुबे ने कहा, "हम जो संसद के अंदर बोलते हैं वो संविधान के आर्टिकल 105 के अनुसार हमें बोलने की आजादी है। उसी 105 में लिखा है कि कई चीजें ऐसी हैं जिसे स्पीकर को नियम बनाना है। आर्टिकल 19 को सबसे पहले ध्यान में रखना है। आर्टिकल 19 का प्वाइंट 3 और 4 कहता है कि जहां दूसरे देशों के साथ संबंध खराब होने की बात हो, पड़ोसी देशों की बात हो, राष्ट्रीय सुरक्षा की बात हो उन चीजों में बात करने में परहेज करना चाहिए नहीं बात करनी चाहिए।"


दुबे ने रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए आगे कहा, "ये 140 करोड़ लोगों और सांसदों पर भी लागू होता है। आपको पता ही नहीं कौन सी किताब है। सदन के कुछ नियम हैं। सदन में आप किसी किताब या अखबार को कोट नहीं कर सकते। राहुल गांधी जी को ना संविधान, ना स्पीकर की रूलिंग, ना आर्टिकल 349, ना 352 B, ना 353 पर भरोसा है। किसी चीज पर भरोसा ही नहीं है।"

संसदीय मंत्री ने भी बोला हमला

वहीं, केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "हमारी पार्टी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव शुरू किया। हम सभी विपक्ष के नेता राहुल गांधी का भाषण सुनने के लिए बैठे थे। लेकिन शुरू से ही राहुल गांधी ने नियमों का उल्लंघन किया और एक ऐसी किताब से कोट करना शुरू कर दिया, जिसके पब्लिकेशन और ऑथेंटिसिटी के बारे में साफ तौर पर कुछ नहीं बताया गया है। रक्षा मंत्री और हम सभी ने कहा कि सदन नियमों के अनुसार चलेगा और सभी को नियमों के अनुसार ही बोलना चाहिए। कोई भी चेयर को चुनौती नहीं दे सकता।"

बीजेपी नेता ने आगे कहा, "लोकसभा स्पीकर के फैसले के बाद भी राहुल गांधी वही गलती दोहराते रहे। उन्होंने आधा घंटा बर्बाद किया, नियमों का उल्लंघन किया और वही बातें दोहराते रहे। उन्होंने चीन सीमा के बारे में बोलना शुरू कर दिया। क्या कांग्रेस पार्टी वह जमीन वापस ला सकती है जो 1959 और 1962 में चीन ने कब्जा कर ली थी?। राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए। अगर कोई जाने-माने परिवार में पैदा होता है, तो क्या वे संसद से ऊपर है? क्या वे नियमों से ऊपर हैं?"

उन्होंने यह भी कहा, "भारत एक लोकतांत्रिक देश है और नियमों के अनुसार चलता है। राहुल गांधी किसी नियम का पालन नहीं करते। वे खुद को संसद से ऊपर समझते हैं। कांग्रेस के सीनियर नेता खड़े हो गए और तालियां बजाने लगे। राहुल गांधी को अपने दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए और अपने सांसदों को नियमों का पालन करने के लिए समझाना चाहिए। यह मेरी उनसे गुजारिश है। उन्हें चीन सीमा के संबंध में कांग्रेस के पाप के लिए माफी मांगनी चाहिए।"

अप्रकाशित किताब को लेकर भारी हंगामा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को सदन में पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब के कुछ अंश का हवाला देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर निशाना साधने का प्रयास किया। इस पर सत्तापक्ष ने भारी विरोध जताया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही तीन फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी गई।

राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए अपने भाषण की शुरुआत में ही बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए पलटवार करने का प्रयास किया।

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उनका कहना था कि सूर्या ने कांग्रेस की देशभक्ति और चरित्र पर सवाल खड़े किए हैं। इसलिए वह एक पूर्व सेना प्रमुख के उस किताब के अंश को पढ़ना चाहते हैं जो एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। आसन से उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली। इस विषय पर सदन में सत्तापक्ष और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक एवं हंगामा देखने को मिला।

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