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Om Birla News: ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव पर 9 मार्च हो सकती है चर्चा, क्या लोकसभा स्पीकर को हटाने में सफल होगा विपक्ष?

No-confidence motion: विपक्षी पार्टियों ने ओम बिरला को स्पीकर पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार (10 फरवरी) को लोकसभा महासचिव को सौंप दिया। विपक्ष ने बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन चलाने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने तथा अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Feb 11, 2026 पर 10:34 AM
Om Birla News: ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव पर 9 मार्च हो सकती है चर्चा, क्या लोकसभा स्पीकर को हटाने में सफल होगा विपक्ष?
No-confidence motion: विपक्ष ने ओम बिरला को हटाने के लिए नोटिस दिया है। इस पर 9 मार्च को चर्चा होगी

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष की तरफ से लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव पर वर्तमान बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन 9 मार्च को सदन में चर्चा कराई जा सकती है। सूत्रों ने कहा, "संभावना है कि बजट सत्र के दूसरे भाग के पहले दिन, यानी 9 मार्च को ही लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है।" सूत्रों का यह भी कहना है कि मामले का निपटारा होने तक बिरला आसन पर नहीं बैठेंगे। बिरला ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया है कि वह विपक्ष के नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई करें।

विपक्ष ने ओम बिरला को स्पीकर के पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार (10 फरवरी) को लोकसभा महासचिव को सौंपा। विपक्ष बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने तथा अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।

लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि विपक्ष की ओर से नोटिस सौंपे जाने के बाद लोकसभा स्पीकर बिरला ने फैसला किया कि वह मामले का निपटारा होने तक आसन पर नहीं बैठेंगे। उन्होंने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया कि नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। सूत्रों ने यह भी कहा कि नोटिस पर विचार किया जाएगा। फिर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को यह नोटिस सौंपा। विपक्ष को दो बार नोटिस सौंपना पड़ा क्योंकि पहली बार जो नोटिस सौंपा गया था कि उसमें सदन के भीतर कुछ घटनाक्रमों का उल्लेख करते समय जिन तिथियों का हवाला दिया गया था उनमें गलती थी।

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