Bangladesh: 'ढाका में कोई भी भारतीय सुरक्षित नहीं...', सरोद वादक शिराज अली खान ने सुनाई आपबीती, बोले- 'जान बचाने के लिए छुपानी पड़ी पहचान'

Bangladesh Travel Safety: एयरपोर्ट तक का सफर शिराज के लिए किसी थ्रिलर फिल्म जैसा था। डर के मारे उन्होंने अपना फोन और भारतीय पासपोर्ट ड्राइवर के पास छिपा दिया था। रास्ते में एक चेकपोस्ट पर जब उन्हें रोका गया और विदेशी मुद्रा के बारे में पूछताछ की गई, तो उन्होंने अपनी भारतीय पहचान जाहिर नहीं की

अपडेटेड Dec 22, 2025 पर 1:08 PM
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शनिवार शाम को कोलकाता सुरक्षित लौटे शिराज ने वहां के जो हालात बताए हैं, वे बेहद डराने वाले है

Bangladesh Violence: कोलकाता के मशहूर सरोद वादक शिराज अली खान के लिए ढाका का दौरा एक भयानक ट्रेजडी में बदल गया। जिस मंच पर उन्हें अपनी परफॉर्मेंस देना था, उपद्रवियों ने चंद घंटों पहले ही उसे तहस-नहस कर दिया। बांग्लादेश में बिगड़ते हालातों और बढ़ती हिंसा के बीच, उन्हें अपनी जान बचाने के लिए अपनी राष्ट्रीयता तक छिपानी पड़ी। शनिवार शाम को कोलकाता सुरक्षित लौटे शिराज ने वहां के जो हालात बताए हैं, वे बेहद डराने वाले है। उनका कहना है कि आज के दौर में कोई भी भारतीय ढाका में सुरक्षित नहीं महसूस कर सकता।

परफॉरमेंस से पहले ही तबाह हो गया ऑडिटोरियम

शिराज अली खान को 19 दिसंबर को ढाका के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्र 'छायानौत' में सरोद वादन करना था। लेकिन उसी सुबह उन्हें खबर मिली कि उपद्रवियों ने उस इमारत में तोड़फोड़ की है। दरअसल, कट्टरपंथी नेता शरीफ ओसमान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में हिंसा भड़क उठी थी, जिसका निशाना इस सांस्कृतिक केंद्र को बनाया गया। शिराज ने बताया कि जिस इमारत में उन्हें परफॉर्म करना था, उसकी तस्वीरें देखकर वे कांप गए। उन्होंने तुरंत वापस लौटने का फैसला किया, क्योंकि वहां रुकना अब मौत को दावत देने जैसा था।


पहचान छिपाकर किया एयरपोर्ट तक सफर

एयरपोर्ट तक का सफर शिराज के लिए किसी थ्रिलर फिल्म जैसा था। डर के मारे उन्होंने अपना फोन और भारतीय पासपोर्ट ड्राइवर के पास छिपा दिया था। रास्ते में एक चेकपोस्ट पर जब उन्हें रोका गया और विदेशी मुद्रा के बारे में पूछताछ की गई, तो उन्होंने अपनी भारतीय पहचान जाहिर नहीं की। अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने अपनी मां से सीखी हुई 'ब्राह्मणबाड़िया' की स्थानीय भाषा में बात की ताकि किसी को शक न हो कि वे भारत से आए हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा, 'मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे अपनी पहचान छिपाकर भागना पड़ेगा।'

सांस्कृतिक विरासत पर हो रहे हमले

शिराज अली खान का बांग्लादेश से गहरा नाता है; वे महान सरोद वादक उस्ताद अली अकबर खान के पोते और बाबा अलाउद्दीन खान के परपोते हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि सालों पहले उनके परदादा के नाम पर बने कॉलेज पर हमला हुआ था और अब 'छायानौत' जैसे सांस्कृतिक धरोहर को निशाना बनाना हमारी साझी संस्कृति पर गहरी चोट है। शिराज तो लौट आए, लेकिन उनके तबला वादक और कई साथी कलाकार अब भी ढाका में फंसे हुए हैं। उनकी मां भी वहीं हैं, जिन्हें लेकर वे बेहद चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि जब तक कलाकारों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, वे वहां दोबारा कदम नहीं रखेंगे।

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