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National Herald: कर्नाटक सरकार ने 'नेशनल हेराल्ड' पर पैसों की बारिश! मिले विज्ञापन के 69% फंड; BJP ने बताया 'खुली लूट'

National Herald: आलोचकों और विपक्षी दलों का कहना है कि सरकारी विज्ञापनों का उद्देश्य जन-कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना होता है। लेकिन नेशनल हेराल्ड जैसे कम प्रसार वाले अखबार को इतना बड़ा फंड देना यह संकेत देता है कि किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा वाले प्रकाशन को आर्थिक सहारा देने के लिए किया जा रहा है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Jan 08, 2026 पर 4:05 PM
National Herald: कर्नाटक सरकार ने 'नेशनल हेराल्ड' पर पैसों की बारिश! मिले विज्ञापन के 69% फंड; BJP ने बताया 'खुली लूट'
वित्तीय वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय स्तर के अखबारों के लिए आवंटित कुल ₹1.42 करोड़ में से अकेले नेशनल हेराल्ड को ₹99 लाख यानी करीब 69% दिए गए

National Herald: कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार एक नए विवाद में घिर गई है। आरोप है कि राज्य सरकार ने जनता के पैसे का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस से जुड़े अखबार 'नेशनल हेराल्ड' को विज्ञापनों के रूप में दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि कर्नाटक में इस अखबार का न तो कोई खास सर्कुलेशन है और न ही बड़ी पाठक संख्या, फिर भी इसे बड़े राष्ट्रीय दैनिकों से कहीं अधिक फंड मिला है।

विज्ञापन खर्च के चौंकाने वाले आंकड़े

दस्तावेजों के अनुसार, नेशनल हेराल्ड पिछले दो वित्तीय वर्षों में कर्नाटक सरकार से विज्ञापन पाने वाला सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में अखबार को सरकारी खजाने से ₹1.90 करोड़ मिले। वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय स्तर के अखबारों के लिए आवंटित कुल ₹1.42 करोड़ में से अकेले नेशनल हेराल्ड को ₹99 लाख यानी करीब 69% दिए गए। कई बड़े और स्थापित राष्ट्रीय अखबारों को नेशनल हेराल्ड के मुकाबले आधा फंड भी नहीं मिला, जबकि कुछ को कुछ भी आवंटित नहीं किया गया।

'टैक्सपेयर्स के पैसे की लूट'

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