PM Operation Sindoor: पीएम मोदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पहली बार देश को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की उपलब्धियों को बताया। दरअसल 'ऑपरेशन सिंदूर' भारतीय सेना का 7 मई, 2025 को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किया गया एक सैन्य अभियान था। इस ऑपरेशन का उद्देश्य पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाना था. सेना ने बताया कि इस ऑपरेशन के तहत 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया गया।
क्या-क्या हुआ 'ऑपरेशन सिंदूर' में?
इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना ने नौ आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए। भारत ने इस बात जोर देकर कहा कि इन हमलों में किसी भी पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना नहीं बनाया गया था। इस ऑपरेशन में मुख्य रूप से लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी समूहों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। भारत ने दावा किया कि इन हमलों में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।
पाकिस्तानी प्रतिक्रिया और भारत का पलटवार
भारतीय हमलों के बाद, पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों से भारत के सीमावर्ती हिस्सों पर जवाबी हमले किए, जिन्हें भारत ने सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया। इसके बाद, भारत ने पाकिस्तान के अंदर गहराई तक सैन्य ठिकानों जैसे रडार इंस्टॉलेशन, कमांड और कंट्रोल सेंटर और गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाया।
भारत ने पाकिस्तान के कई हवाई अड्डों और सैन्य प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचाने के वीडियो जारी किए। भारत ने स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर में उसके पांच सैनिक शहीद हुए, जबकि पाकिस्तान के लगभग 35-40 कर्मियों के हताहत होने का अनुमान लगाया गया।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और सीजफायर
इस सैन्य टकराव के बाद, अमेरिका से लेकर पूरे विश्व तक चैनता का विषय बना रहा। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई। दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच बातचीत के बाद युद्धविराम पर सहमति बनी। भारत ने स्पष्ट किया कि उसका लक्ष्य केवल आतंकवादियों और उनके समर्थन नेटवर्क को निशाना बनाना था, न कि पाकिस्तानी सेना को। भारत ने आतंकवाद के प्रति अपनी 'शून्य-सहिष्णुता' नीति को दोहराया और कहा कि वह सीमा पार आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए दृढ़ है। 'ऑपरेशन सिंदूर' भारत का आतंकवाद के खिलाफ अपनी दृढ़ प्रतिक्रिया और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने की इच्छाशक्ति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण था।