नींद खुलते ही लोगों को पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर इंडिया के ऑपरेशन का पता चला। पहलगाम में आतंकी हमले के करीब 2 हफ्ते बाद इंडिया ने हमले की साजिश रचने वालों को ऐसी सजा दी, जिसे पाकिस्तान कभी भूल नहीं पाएगा। इधर, लोगों ने राहत की सांस ली, क्योंकि पहलगाम के गुनाहगारों को आखिरकार उनकी करनी की सजा मिल गई। सुबह 10:30 बजे सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन स्थितियों के बारे में बताया, जिसमें इंडिया के पास आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के सिवाय दूसरा कोई रास्ता नहीं रह गया था। लेकिन, जब पूरा भारत गहरी नींद में सो रहा था, तब कुछ खास लोगों की आंखों से नींद कोसों दूर थी। आइए इन खास लोगों के बारे में जानते हैं।
कुछ मिनटों के इस ऑपरेशन के पीछे कई दिनों की मेहनत थी
इंडिया ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) रात ठीक 12:37 बजे शुरू किया। पहले से तैयार आतंकी ठिकानों की लिस्ट ऑपरेशन को अंजाम देने वाले हर व्यक्ति के पास थी। इस बात की पूरी सावधानी बरती जा रही थी कि गलती से किसी सिविलियन ठिकाना निशाने की जद में न आ जाए। इस ऑपरेशन को नेशनल सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (Ajit Doval) कमांड कर रहे थे। कुछ मिनटों में पूरे होने वाले इस ऑपरेशन के पीछे डोभाल की कई दिनों की मेहनत थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ऑपरेशन को हरी झंडी मिलते ही वह अपने मिशन में जुट गए थे।
हर छोटे-बड़े आतंकी ठिकानों की जानकारी जुटाई गई
डोभाल ने सबसे पहले एक ऐसी समर्पित टीम तैयार की, जिसका काम सिर्फ पाकिस्तान में आतंक के नेटवर्क के बारे में हर छोटी-बड़ी जानकारी जुटाना था। इस टीम ने दर्जनों ऐसे ठिकानों को चिन्हित किया जिनका इस्तेमाल आतंक की पाठशाला चलाने के लिए हो रहा था। फिर इनमें से उन ठिकानों को शॉर्टलिस्ट किया गया जिन्हें इंडिया के हितों के लिहाज से सबसे खतरनाक माना गया। आखिर में ऐसे 9 ठिकानों की लिस्ट तैयार की गई। फिर इन ठिकानों पर करीबी नजर रखी गई। इनमें आनेजाने वाले लोगों और उनकी गतिविधियों को ट्रैक किया गया।
ऑपरेशन को सिर्फ आतंकी ठिकानों तक सीमित रखने का निर्देश
आतंकी ठिकानों की लिस्ट फाइनल करने के बाद डोभाल ने सशस्त्र बलों के साथ मिलकर हमले का प्लान बनाना शुरू किया। प्लान टेबल पर आने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री को इसके बारे में विस्तार से बताया। व्यापक बातचीत के बाद यह तय हुआ कि इस ऑपरेशन को सिर्फ आतंकी ठिकानों तक सीमित रखा गया। किसी भी कीमत पर इंडियन फोर्सेज मिलिट्री और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना नहीं बनाएंगे। टॉप लीडरशिप का मानना था कि इंडिया के इस ऑपरेशन से पाकिस्तान के आम लोगों को कम से कम नुकसान होना चाहिए।
प्रधानमंत्री की हरी झंडी मिलते ही मिशन शुरू हुआ
प्रधानमंत्री की सलाह और हरी झंडी मिलने के बाद डोभाल ने ऑपरेशन को अंजाम देने की तैयारी शुरू कर दी। इस पूरे मिशन में नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (NTRO) की मदद ली गई। इस बात का ध्यान रखा गया कि इस ऑपरेशन के बारे में जरूरी लोगों को छोड़ किसी दूसरे को भनक तक नहीं लगे। ऑपरेशन का ब्लूप्रिंट तैयार होने के बाद डोभाल दोबारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास पहुंचे। प्रधानमंत्री ने प्लान के ब्लूप्रिंट से संतुष्ट होने के बाद उसे अपनी मंजूरी दे दी।
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घड़ी में 12:37 बजते ही फाइटर प्लेन ने काम शुरू कर दिए
ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया गया, जिसका कमांड डोभाल के पास था। इस रूम में चुनिंदा लोगों को एक्सेस दिया गया। हमले में शामिल लोगों को अब उस घड़ी का इंतजार था, जिसे ऑपरेशन शुरू करने के लिए चुना गया था। घड़ी में 12:37 बजते ही लड़ाकू विमानों ने आतंकी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। कुछ ही मिनटों में पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर के 9 ऐसे ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया गया, जो पिछले कई सालों से इंडिया को बड़े जख्म देने की साजिश रचने के केंद्र बने हुए थे।