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रोजगार के मानचित्र पर 'अवसरों की धरती' बनकर उभर रहा उत्तर प्रदेशः पलायन नहीं, युवाओं की प्रगति का बना माध्यम

वास्तव में, उत्तर प्रदेश का 2026-27 का बजट और पिछले वर्षों की नीतियां यह संकेत देती हैं कि राज्य के युवाओं को न केवल उनके ही शहरों-गांवों व आसपास के क्षेत्रों में रोजगार मिल रहा है, बल्कि वह स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बन अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार से अवसरों का सृजन कर रहे हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 13, 2026 पर 3:56 PM
रोजगार के मानचित्र पर 'अवसरों की धरती' बनकर उभर रहा उत्तर प्रदेशः पलायन नहीं, युवाओं की प्रगति का बना माध्यम
उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी दर 2.24 प्रतिशत रही है। यह आंकड़ा अपने आप में एक संकेत है कि रोजगार सृजन की प्रक्रिया जमीन पर असर दिखा रही है

उत्तर प्रदेश को लेकर लंबे समय तक एक धारणा प्रचलित रही कि यहां के युवाओं को रोजगार के लिए बड़े शहरों या अन्य राज्यों की ओर पलायन करना पड़ता है। विपक्ष की कुछ आलोचनाओं में इस बात को उठाया गया कि प्रदेश के बजट में रोजगार का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिखता और शिक्षित बेरोजगारी की समस्या की अनदेखी की जा रही है। शहरी और अर्ध-शहरी युवाओं की चिंताओं को भी इसी संदर्भ में सामने रखा जाता है। मगर, यदि तथ्यों और नीतिगत दिशा को समग्रता में देखा जाए, तो एक अलग ही तस्वीर उभरती है, जो इन निराधार बातों को ध्वस्त कर देती है।

स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बन रहे युवा

वास्तव में, उत्तर प्रदेश का 2026-27 का बजट और पिछले वर्षों की नीतियां यह संकेत देती हैं कि राज्य के युवाओं को न केवल उनके ही शहरों-गांवों व आसपास के क्षेत्रों में रोजगार मिल रहा है, बल्कि वह स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बन अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार से अवसरों का सृजन कर रहे हैं। ऐसे में, अब उत्तर प्रदेश रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला प्रदेश बनने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।

बेरोजगारी दर और आय में सुधार है स्पष्ट संकेत

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