उत्तर प्रदेश को लेकर लंबे समय तक एक धारणा प्रचलित रही कि यहां के युवाओं को रोजगार के लिए बड़े शहरों या अन्य राज्यों की ओर पलायन करना पड़ता है। विपक्ष की कुछ आलोचनाओं में इस बात को उठाया गया कि प्रदेश के बजट में रोजगार का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिखता और शिक्षित बेरोजगारी की समस्या की अनदेखी की जा रही है। शहरी और अर्ध-शहरी युवाओं की चिंताओं को भी इसी संदर्भ में सामने रखा जाता है। मगर, यदि तथ्यों और नीतिगत दिशा को समग्रता में देखा जाए, तो एक अलग ही तस्वीर उभरती है, जो इन निराधार बातों को ध्वस्त कर देती है।
