Pahalgam Attack: पाकिस्तान पर कब हमला करेगा भारत, एक्शन में क्यों लग रहा है इतना समय?

मोदी सरकार के ऊपरी स्तर पर यह माना जा रहा है कि देश में सामूहिक हिंदू आक्रोश को संतुष्ट किया जाना बहुत जरूरी है। लेकिन क्या भारत अपनी अंतिम प्रतिक्रिया तय करने के लिए भूराजनीति (Geopolitics) और भू-अर्थशास्त्र (Geoeconomics) को भी ध्यान में रख रहा है, ताकि मोदी पाकिस्तान के बहकावे में आकर बड़े स्तर पर युद्ध शुरू न कर दें?

अपडेटेड May 05, 2025 पर 2:07 PM
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India-Pakistan Tensions: पहलगाम आतंकी हमले में 26 बेकसूर नागरिकों की जान चली गई

पहलगाम में हुए कायराना हमले को 13 दिन बीत चुके हैं, जिसमें 26 बेकसूर नागरिकों की जान चली गई। ऐसे में हर भारतीय के मन में एक ही सवाल है कि भारत कब पलटवार करेगा या भारत कब हमला करेगा? 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद 11 दिनों में और 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद महज 12 दिनों के भीतर पाकिस्तान के अंदर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी गई थी। पहलगाम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कड़े शब्दों से संकेत मिलता है कि स्ट्राइक बहुत जल्द हो सकती है।

सरकार के ऊपरी स्तर पर यह माना जा रहा है कि देश में सामूहिक हिंदू आक्रोश को संतुष्ट किया जाना बहुत जरूरी है। लेकिन क्या भारत अपनी अंतिम प्रतिक्रिया तय करने के लिए भूराजनीति (Geopolitics) और भू-अर्थशास्त्र (Geoeconomics) को भी ध्यान में रख रहा है, ताकि मोदी पाकिस्तान के बहकावे में आकर बड़े स्तर पर युद्ध शुरू न कर दें?

सबसे पहले, आइए बात करते हैं कि 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को सचेत करने और उसे डराने के लिए क्या किया है। फिर, जानते हैं कि भारत को इस बार एक्शन लेने पर समय क्यों लग सकता है।


हम इस पर काम कर रहे हैं?

प्रधानमंत्री ने पहले यह कहकर पाकिस्तान को झकझोर दिया कि वे पहलगाम हमलावरों और उनके समर्थकों की तलाश में “दुनिया के छोर तक” जाएंगे। उन्होंने कुछ दिनों बाद अपना संदेश दोहराया और सबसे कठोर जवाब देने का वादा किया।

फिर सरकार ने तीनों सेना प्रमुखों, CDS, NSA और रक्षा मंत्री के साथ प्रधानमंत्री की बैठक की तस्वीरें जारी करने का फैसला किया। इतना ही नहीं, इसके साथ ही यह जानकारी भी दी गई कि प्रधानमंत्री ने सेनाओं को भारत की प्रतिक्रिया का तरीका, टारगेट और टाइम खुद चुनने की आजादी दी।

इसके कुछ दिनों बाद अमित शाह ने ये साफ किया, 'पहलगाम के हर एक गुनहगार और उनकी मदद करने वालों को मुंहतोड़ जवाब मिलेगा, चुन चुन कर जवाब मिलेगा।' एक दिन पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तो खुलकर कह दिया, 'मैं आश्वस्त करता हूं कि प्रधानमंत्री के नेतृ्त्व में जैसा आप चाहते हैं वैसा ही अब होकर रहेगा।'

मंगलवार की बड़ी बैठक के बाद, PM मोदी ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों से अलग-अलग मुलाकात भी की। उन्होंने थल सेना अध्यक्ष से बुधवार को मुलाकात की, शनिवार को नौसेना अध्यक्ष से मिले और रविवार को वायु सेना प्रमुख के साथ मीटिंग की।

अब कयास ये लगाए जा रहे हैं कि टेबल पर कई ऑप्शन हैं। इसक मैसेज बाहरी और अंदरूनी दोनों जगह पर देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीरें देखने के बाद पाकिस्तान के हाथ पांव ऐसे फूल गए कि उसने यह तक कह डाला कि भारत अगले 24 से 36 घंटे में हमले करने के लिए तैयार है। घबराहट ऐसी थी कि उसने आधी रात को दुनियाभर के नेताओं को उठा दिया और ये मैसेज उन तक पहुंचाया।

पाकिस्तान अपनी आर्मी, एयर फोर्स और नेवी तीनों की ही मूवमेंट कर दी। ये सब तब हुआ, जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था एकदम खस्ताहाल है और वो इस तरह के मूवमेंट की लागत का बोझ ज्यादा दिनों तक झेल नहीं पाएगा।

हमले में देरी करके भारत ने न केवल पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि पाकिस्तान के मन में लगातार भारत का खौफ भी बढ़ा दिया है।

संदेश आंतरिक भी था- नागरिकों को, उन्हें आश्वस्त करते हुए कि सरकार इस काम में सबसे आगे है। सिंधु जल संधि (IWT) पर रोक जैसे कदमों ने या तो पाकिस्तान की ओर जाने वाली नदियों में पानी का फ्लो कम कर दिया है या बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जो उनकी फसलों के लिए विनाशकारी है।

भारत ने पहलगाम हमले के मद्देनजर पाकिस्तान की फंडिंग पर रोक लगाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और FATF से भी गुहार लगाई है। लेकिन सरकार जानती है कि हिंदू बहुसंख्यकों की भावनाओं खासकर उनके सामूहिक गुस्से की भावना, को स्वीकार किया जाना चाहिए और पाकिस्तान के खिलाफ सीधी कार्रवाई करके उसका समाधान किया जाना चाहिए।

पूरे भारत में लोग गुस्से में हैं और अपमानित महसूस कर रहे हैं कि आतंकवादियों ने हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाकर उनकी हत्या कर दी है। हो सकता है कि भारत भू-राजनीति को देखते हुए अपनी प्रतिक्रिया को बैलेंस कर रहा हो। इससे हम अगले बड़े सवाल पर आते हैं।

क्या पाकिस्तान चाहता है कि मोदी उसके झांसे में आ जाएं?

पहलगाम हमले का समय अजीब है - यह ऐसे समय में हुआ, जब भारत की विकास गाथा तेजी से आगे बढ़ रही है, और हम अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करने वाले पहले देश बनने की ओर अग्रसर हैं, ऐसे समय में जब चीन, हाई अमेरिकी टैरिफ के कारण, ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट का सामना कर रहा है, और जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर बलूचिस्तान हमले के बाद अपने देश में घोर अलोकप्रियता का सामना कर रहे हैं। पहलगाम हमले से कुछ दिन पहले मुनीर ने भड़काऊ बयान दिया था।

फिलहाल भारत की ओर से कोई उकसावे की कार्रवाई नहीं की गई। जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों को इस तरह से कभी निशाना नहीं बनाया गया। यह हमला मोदी को उकसाने और उन्हें जवाबी कार्रवाई करने के लिए मजबूर करने की एक साफ चाल लगती है।

दिलचस्प बात यह है कि पहलगाम हमले के बाद से ही पाकिस्तान ही सभी विश्व मंचों पर ‘जल्द युद्ध’ की बात कर रहा है, भारत नहीं। एक बड़ा युद्ध भारत की विकास कहानी को पटरी से उतार सकता है, और ऐसा टकराव भारत को व्यापार करने के लिए एक अनाकर्षक गंतव्य के रूप में पेश कर सकता है।

पिछले हफ्ते पाकिस्तान में जो कुछ हुआ, उस पर नजर डालें तो - मुनीर ने ISI प्रमुख को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का पद भी दिलाने में सफलता हासिल कर ली है, जिसे कई लोग एक तरह से तख्तापलट के रूप में देखते हैं, जिससे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का पद और शक्ति मानद हो गई है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में और द्विपक्षीय संबंधों के जरिए चीन की ओर से पाकिस्तान का खुला समर्थन करने से भी कोई संभावना नहीं रह गई है।

सीधे शब्दों में कहें, तो पाकिस्तान और चीन चाहते हैं कि मोदी इस प्रलोभन में आकर एक बड़ा संघर्ष शुरू कर दें, जिससे निश्चित रूप से भारत और इस क्षेत्र पर भू-राजनीतिक बादल छा जाएंगे। यह वैश्विक कूटनीतिक हलकों में भारत और पाकिस्तान को एक दूसरे से अलग कर देगा, जिसे तोड़ने की कोशिश भारत ने की है।

ऐसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने इस भू-राजनीतिक खेल को समझ लिया है, और उप-राष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि भारत पहलगाम आतंकी हमले पर इस तरह से प्रतिक्रिया देगा, जिससे बड़ा क्षेत्रीय संघर्ष पैदा न हो।

इससे पता चलता है कि अमेरिका भारत की ओर से की गई ‘सीमित कार्रवाई’ का समर्थन करता है। 2019 में भी ट्रंप का यही रुख था, जब अमेरिका ने बालाकोट में भारत की कार्रवाई को “आतंकवाद विरोधी कार्रवाई” करार दिया था।

भारत क्या करेगा और कब करेगा? प्राथमिकता अपराधियों को बेअसर करना है, जिनके खिलाफ पिछले 13 दिनों से पीर पंजाल रेंज में ऑपरेशन चल रहा है। भारत पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को हमेशा के लिए खत्म करना चाहता है और पाकिस्तानी सेना और उसके प्रमुख असीम मुनीर को कठघरे में खड़ा करना चाहता है।

लेकिन भारत को इसमें समय लग सकता है। इसलिए शांत रहें। नेतृत्व पर भरोसा रखें। पहलगाम के लिए न्याय मिलेगा - सही तरीके से, सही समय पर...।

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