सोशल मीडिया और गेमिंग ऐप्स पर अब देना होगा आधार-PAN! संसदीय समिति ने की KYC और उम्र वेरिफिकेशन अनिवार्य करने की सिफारिश

Parliamentary Panel On Cyber Crimes: संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि इंटरनेट पर फर्जी पहचान के जरिए होने वाले अपराधों को रोकना जरूरी हो गया है। समिति ने सिफारिश की है कि सभी सोशल मीडिया, डेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर आधिकारिक दस्तावेजों के जरिए KYC अनिवार्य हो। इससे फेक प्रोफाइल पर लगाम लगेगी और अपराधी की ट्रैसेबिलिटी आसान हो जाएगी

अपडेटेड Mar 24, 2026 पर 10:31 AM
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समिति ने बच्चों के लिए भी सख्त 'एज-वेरिफिकेशन' प्रोटोकॉल की मांग की है

KYC Based Verification: महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए एक संसदीय समिति ने केंद्र सरकार को बेहद कड़े सुझाव दिए हैं। 'महिलाओं के सशक्तिकरण पर संसदीय समिति' ने अपनी ताजा रिपोर्ट में 'साइबर अपराध और महिलाओं की साइबर सुरक्षा' के लिए सिफारिश की है कि सोशल मीडिया, डेटिंग और गेमिंग ऐप्स के लिए KYC यानी नो योर कस्टमर और उम्र का वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया जाए।

फेक प्रोफाइल पर लगे लगाम

संसदीय समिति ने गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि इंटरनेट पर फर्जी पहचान के जरिए होने वाले अपराधों को रोकना अब जरूरी हो गया है। समिति ने सिफारिश की है कि सभी सोशल मीडिया, डेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर आधिकारिक दस्तावेजों के जरिए यूजर की पहचान (KYC) अनिवार्य हो। इससे फेक प्रोफाइल, किसी दूसरे के नाम का इस्तेमाल और गुमनाम रहकर किए जाने वाले उत्पीड़न पर लगाम लगेगी। केवाईसी लिंक होने से ट्रैसेबिलिटी आसान हो जाएगी और पुलिस के लिए अपराधी तक पहुंचना आसान होगा।


डेटिंग और गेमिंग ऐप्स के लिए सख्त नियम

समिति ने विशेष रूप से डेटिंग और ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स को लेकर भी चिंता जताई है:

एज-गेटिंग सिस्टम: बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से अनुपयुक्त कंटेंट से बचाने के लिए सख्त 'एज-वेरिफिकेशन' प्रोटोकॉल की मांग की गई है।

लाइसेंसिंग और जुर्माना: इन ऐप्स के लिए सख्त लाइसेंसिंग नियम बनाने का सुझाव दिया गया है। जो प्लेटफॉर्म महिलाओं और नाबालिगों को धोखाधड़ी या जबरदस्ती से बचाने में विफल रहेंगे, उन पर भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है।

हाई-रिस्क फ्लैग: जिन अकाउंट्स की बार-बार शिकायत आती है, उन्हें 'हाई-रिस्क' श्रेणी में डालने और समय-समय पर उनका दोबारा वेरिफिकेशन करने को कहा गया है।

साइबर स्टॉकिंग के साथ अब्यूसिव कंटेन्ट पर प्रहार

पैनल ने रेखांकित किया कि बिना वेरिफिकेशन वाले अकाउंट्स का इस्तेमाल साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन हैरेसमेंट और बिना सहमति के निजी तस्वीरें साझा करने के लिए किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और पहचान की चोरी के बढ़ते मामलों को देखते हुए कमेटी ने अपनी सिफारिश में एक त्वरित शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर जोर दिया है।

निजता और डेटा सुरक्षा पर छिड़ी बहस

हालांकि ये सिफारिशें सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनसे एक नई बहस भी शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनिवार्य केवाईसी से सरकार की निगरानी बढ़ सकती है और इससे निजता का खतरा है। इतने बड़े स्तर पर यूजर्स के आधिकारिक दस्तावेज जमा होने से डेटा लीक होने का खतरा भी बढ़ सकता है। इसके साथ ही जिन लोगों के पास औपचारिक पहचान पत्र नहीं हैं, वे इन सेवाओं के इस्तेमाल से वंचित हो सकते हैं।

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