Trade Deal: 'भारतीय कृषि के लिए है आक्रामक अवसर...', केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने समझाया अमेरिका के साथ ट्रेड डील का असली सच

India US Trade Deal: गोयल ने साफ किया कि भारत ने केवल उन्हीं क्षेत्रों में रियायतें दी हैं जहां हमारा पलड़ा भारी है, जबकि डेयरी, चावल, गेहूं और सोयाबीन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के चारों ओर 'लक्ष्मण रेखा' खींच दी गई है। मंत्री का कहना है कि भारत का कृषि और मछली निर्यात 55 अरब डॉलर का है, जबकि आयात केवल 30 अरब डॉलर है

अपडेटेड Feb 09, 2026 पर 9:07 AM
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इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय चाय, कॉफी, मसालों और फलों के लिए अपना बाजार शून्य शुल्क पर खोल दिया है, जो निर्यातकों के लिए बड़ी जीत है

India-US Trade Deal: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को भारत के लिए एक 'आक्रामक अवसर' बताया है। इसके साथ ही उन्होंने उन चिंताओं को खारिज कर दिया है, जिनमें भारतीय किसानों के हितों की अनदेखी की बात कही जा रही थी। एक इंटरव्यू में गोयल ने साफ किया कि भारत ने केवल उन्हीं क्षेत्रों में रियायतें दी हैं जहां हमारा पलड़ा भारी है, जबकि डेयरी, चावल, गेहूं और सोयाबीन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के चारों ओर 'लक्ष्मण रेखा' खींच दी गई है। मंत्री का कहना है कि भारत का कृषि और मछली निर्यात 55 अरब डॉलर का है, जबकि आयात केवल 30 अरब डॉलर है। ऐसे में हमें रक्षात्मक होने के बजाय वैश्विक बाजार पर कब्जा करने की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।

मसालों के लिए खुला रास्ता और पशु आहार के लिए दिया छोटा कोटा

इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय चाय, कॉफी, मसालों और फलों के लिए अपना बाजार शून्य शुल्क पर खोल दिया है, जो हमारे निर्यातकों के लिए बड़ी जीत है। वहीं, पशु आहार के आयात को लेकर उठ रहे विवाद पर गोयल ने आंकड़ों के साथ स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि भारत में सालाना 500 लाख टन पशु आहार की खपत होती है, जबकि अमेरिका को मात्र 5 लाख टन का कोटा दिया गया है। यह कुल जरूरत का केवल 1% है। यह फैसला घरेलू उद्योग की बढ़ती मांग और घटती उपजाऊ जमीन को देखते हुए लिया गया है, जिससे सोयाबीन और मक्का उत्पादक किसानों को कोई खतरा नहीं होगा।


किसानों के विरोध पर कही अहम बात

12 फरवरी को किसान संगठनों द्वारा प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए गोयल ने भरोसा दिलाया कि डेयरी उत्पाद, चीनी, पोल्ट्री और जीएम फसलों को इस सौदे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। उन्होंने तर्क दिया कि व्यापार 'तुलनात्मक लाभ' का खेल है और भारत अब उच्च गुणवत्ता वाले सामान बनाने में सक्षम है, इसलिए हमें वैश्विक प्रतिस्पर्धा से डरने की जरूरत नहीं है। गोयल ने यह भी संकेत दिया कि यह समझौता अभी केवल 'पहली किश्त' है। आने वाले समय में सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार की संभावनाओं को तलाशा जाएगा।

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