PM Modi In Somnath: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के सोमनाथ में 'शौर्य यात्रा' के समापन पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए 'औपनिवेशिक मानसिकता' पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद कुछ इतिहासकारों और राजनीतिक शक्तियों ने भारत के गौरवशाली अतीत, विशेष रूप से सोमनाथ मंदिर के इतिहास को मिटाने या उसे तोड़-मरोड़ कर पेश करने का प्रयास किया।
इतिहास के 'व्हाइटवॉश' पर प्रहार
प्रधानमंत्री ने पाठ्यपुस्तकों में आक्रमणकारियों के चित्रण पर सवाल उठाते हुए कहा, 'सोमनाथ पर हुए हमलों को सिर्फ 'धन की लूट' के रूप में दिखाकर उनके पीछे की नफरत और आतंक को छिपाया गया। आक्रमणकारियों के क्रूर इतिहास को 'व्हाइटवॉश' करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी जिन लोगों के मन में गुलामी की सोच थी, उन्होंने खुद को अपनी संस्कृति और पवित्र स्थलों से दूर रखने की कोशिश की।
सरदार पटेल और राजेंद्र प्रसाद के अपमान का किया जिक्र
पीएम मोदी ने मंदिर के पुनरुद्धार के समय हुई राजनीति को याद दिलाया। उन्होंने कहा कि जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब भी कई ताकतों ने इसमें रोड़ा अटकाया था। 1951 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में आने वाले थे, तब भी उन पर आपत्ति जताई गई थी। पीएम ने चेतावनी दी कि वे शक्तियां आज भी सक्रिय हैं और तलवारों की जगह साजिशों से भारत को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।
आक्रमणकारी इतिहास बन गए, सोमनाथ आज भी खड़ा है
पीएम ने सोमनाथ को भारतीय लचीलेपन और अटूट विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि आक्रमणकारियों को लगा कि मंदिर तोड़कर वे जीत गए, लेकिन 1,000 साल बाद भी सोमनाथ का ध्वज गर्व से लहरा रहा है। कट्टरपंथी आक्रमणकारी इतिहास के पन्नों में दब गए, लेकिन सोमनाथ आज भी अडिग है। उन्होंने कहा कि पिछले 1,000 साल का संघर्ष हमें अगले 1,000 साल के लिए तैयार रहने और एकजुट होने की प्रेरणा देता है।
पीएम का यह संबोधन 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के तहत हुआ, जो महमूद गजनवी के 1026 ईस्वी में हुए पहले आक्रमण के 1,000 साल पूरे होने पर आयोजित किया गया है। पीएम मोदी ने 108 घोड़ों के साथ निकाली गई 'शौर्य यात्रा' का नेतृत्व भी किया, जो मंदिर की रक्षा में प्राण देने वाले वीरों का सम्मान है।