PM Modi: SCO शिखर सम्मेलन में होगी पीएम मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक, 7 साल बाद चीन जाएंगे PM मोदी

Pm modi: प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए तियानजिन की यात्रा करेंगे। इस यात्रा के दौरान उनके चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक करने की संभावना है

अपडेटेड Aug 28, 2025 पर 2:15 PM
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यह बैठक उस दौरान हो रही है जब ट्रंप ने रूसी कच्चे तेल के इंपोर्ट को लेकर भारत के खिलाफ 50% टैरिफ का ऐलान किया है

PM Modi China Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्दी ही चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं। पीएम मोदी की यह चीन यात्रा सात साल के बाद हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए तियानजिन की यात्रा करेंगे। इस यात्रा के दौरान उनके चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक करने की संभावना है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन 2020 के हिंसक सीमा संघर्षों के बाद से चले आ रहे तनाव को कम करने के प्रयास जारी रखे हुए हैं। इसके साथ ही ट्रंप ने रूसी कच्चे तेल के इंपोर्ट को लेकर भारत के खिलाफ 50% टैरिफ का ऐलान किया है। SCO शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर भी बातचीत होने की उम्मीद है।

क्या होगा SCO में भारत का एजेंडा?

विदेश मंत्रालय के अधिकारी तन्मय लाल का हवाला देते हुए रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, SCO शिखर सम्मेलन में भारत का मुख्य फोकस व्यापार, कनेक्टिविटी, और संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता पर होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार शी और पुतिन के साथ 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मंच साझा किया था। बता दें कि उस दौरान पश्चिमी देशों के नेता यूक्रेन युद्ध को लेकर रूसी राष्ट्रपति से दूरी बनाए हुए थे।


'ग्लोबल साउथ' की एकजुटता का होगा प्रदर्शन

शी जिनपिंग रविवार से तियानजिन में SCO सम्मेलन में 20 से अधिक विश्व नेताओं की मेजबानी करने वाले हैं। इसका बैठक का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और प्रतिबंधों के बीच 'ग्लोबल साउथ' की एकता को प्रदर्शित करना भी है।आपको बता दें कि शी और मोदी के साथ, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मध्य एशिया, मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के नेताओं के भी इसमें भाग लेने की उम्मीद है।

चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2001 में अपने गठन के बाद से इस साल की बैठक SCO के इतिहास में सबसे बड़ी बैठक होगी। एक समय छह यूरेशियन राज्यों के छोटे समूह तक सीमित रहा एससीओ, अब 10 स्थायी सदस्यों और 16 वार्ता या पर्यवेक्षक राष्ट्रों तक फैल गया है। पहले इसका उद्देश्य सुरक्षा और आतंकवाद-विरोध का था जो अब आर्थिक, रणनीतिक और सैन्य सहयोग तक फैल गया है।

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